Durga Bhajan 8

दुर्गा सप्तशती - आठवां अध्याय

आठवां अध्याय (श्री दुर्गा सप्तशती) – अर्थ सहित
रक्तबीज-वध
मैं भवानीका ध्यान करता हूँ। उनके शरीरका रंग लाल है, नेत्रोंमें करुणा लहरा रही है
तथा हाथोंमें पाश, अंकुश, बाण और धनुष शोभा पाते हैं ।

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खुशहाल करती, माला माल करती

खुशहाल करती, माला माल करती

शेरावाली, अपने भक्तो को निहाल करती

अम्बे रानी वरदानी देती, खोल के भंडारे
झोली ले गया भराके, आया चल के जो द्वारे
माँ के नाम वाला अमृत, जो पिलो एक बार
होगा बाल ना बांका, चाहे बैरी हो संसार

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