शिव पुराण विषय-सूची - Shiva Purana - Index - 3


शिव पुराण विषय-सूची – 3

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शिव पुराण संहिता लिंकविद्येश्वर | रुद्र संहिता | शतरुद्र | कोटिरुद्र | उमा | कैलास | वायवीय


शतरुद्र संहिता

1. शिव पुराण – शतरुद्र संहिता – 1
शिवजीके सद्योजात, वामदेव, तत्पुरुष, अघोर और ईशान नामक पाँच अवतारोंका वर्णन

2. शिव पुराण – शतरुद्र संहिता – 2
शिवजीकी अष्टमूर्तियोंका तथा अर्धनारीनररूपका सविस्तर वर्णन

3. शिव पुराण – शतरुद्र संहिता – 3
वाराहकल्पमें होनेवाले शिवजीके प्रथम अवतारसे लेकर नवम ऋषभ अवतारतकका वर्णन

4. शिव पुराण – शतरुद्र संहिता – 4
शिवजीद्वारा दसवेंसे लेकर अट्ठाईसवें योगेश्वरावतारोंका वर्णन

5. शिव पुराण – शतरुद्र संहिता – 5
नन्दीश्वरावतारका वर्णन

6. शिव पुराण – शतरुद्र संहिता – 6
नन्दीश्वरके जन्म, वरप्राप्ति, अभिषेक और विवाहका वर्णन

7. शिव पुराण – शतरुद्र संहिता – 7
कालभैरवका माहात्म्य, विश्वानरकी तपस्या और शिवजीका प्रसन्न होकर उनकी पत्नी शुचिष्मतीके गर्भसे उनके पुत्ररूपमें प्रकट होनेका उन्हें वरदान देना

8. शिव पुराण – शतरुद्र संहिता – 8
शिवजीका शुचिष्मतीके गर्भसे प्राकट्य, ब्रह्माद्वारा बालकका संस्कार करके ‘गृहपति’ नाम रखा जाना, नारदजीद्वारा उसका भविष्य-कथन, पिताकी आज्ञासे गृहपतिका काशीमें जाकर तप करना, इन्द्रका वर देनेके लिये प्रकट होना, गृहपतिका उन्हें ठुकराना, शिवजीका प्रकट होकर उन्हें वरदान देकर दिक्पालपद प्रदान करना तथा अग्नीश्वरलिंग और अग्निका माहात्म्य

9. शिव पुराण – शतरुद्र संहिता – 9
शिवजीके महाकाल आदि दस अवतारोंका तथा ग्यारह रुद्र-अवतारोंका वर्णन

10. शिव पुराण – शतरुद्र संहिता – 10
शिवजीके ‘दुर्वासावतार’ तथा ‘हनुमदवतार’का वर्णन

11. शिव पुराण – शतरुद्र संहिता – 11
शिवजीके पिप्पलाद-अवतारके प्रसंगमें देवताओंकी दधीचि मुनिसे अस्थि-याचना, दधीचिका शरीरत्याग, वज्र-निर्माण तथा उसके द्वारा वृत्रासुरका वध, सुवर्चाका देवताओंको शाप, पिप्पलादका जन्म और उनका विस्तृत वृत्तान्त

12. शिव पुराण – शतरुद्र संहिता – 12
भगवान् शिवके द्विजेश्वरावतारकी कथा—राजा भद्रायु तथा रानी कीर्तिमालिनीकी धार्मिक दृढ़ताकी परीक्षा

13. शिव पुराण – शतरुद्र संहिता – 13
भगवान् शिवका यतिनाथ एवं हंस नामक अवतार

14. शिव पुराण – शतरुद्र संहिता – 14
भगवान् शिवके कृष्णदर्शन नामक अवतारकी कथा

15. शिव पुराण – शतरुद्र संहिता – 15
भगवान् शिवके अवधूतेश्वरावतारकी कथा और उसकी महिमाका वर्णन

16. शिव पुराण – शतरुद्र संहिता – 16
भगवान् शिवके भिक्षुवर्यावतारकी कथा, राजकुमार और द्विजकुमारपर कृपा

17. शिव पुराण – शतरुद्र संहिता – 17
शिवके सुरेश्वरावतारकी कथा, उपमन्युकी तपस्या और उन्हें उत्तम वरकी प्राप्ति

18. शिव पुराण – शतरुद्र संहिता – 18
शिवजीके किरातावतारके प्रसंगमें श्रीकृष्णद्वारा द्वैतवनमें दुर्वासाके शापसे पाण्डवोंकी रक्षा, व्यासजीका अर्जुनको शक्रविद्या और पार्थिव-पूजनकी विधि बताकर तपके लिये सम्मति देना, अर्जुनका इन्द्रकील पर्वतपर तप, इन्द्रका आगमन और अर्जुनको वरदान, अर्जुनका शिवजीके उद्देश्यसे पुनः तपमें प्रवृत्त होना

19. शिव पुराण – शतरुद्र संहिता – 19
किरातावतारके प्रसंगमें मूक नामक दैत्यका शूकररूप धारण करके अर्जुनके पास आना, शिवजीका किरातवेषमें प्रकट होना और अर्जुन तथा किरातवेषधारी शिवद्वारा उस दैत्यका वध

20. शिव पुराण – शतरुद्र संहिता – 20
अर्जुन और शिवदूतका वार्तालाप, किरातवेषधारी शिवजीके साथ अर्जुनका युद्ध, पहचाननेपर अर्जुनद्वारा शिव-स्तुति, शिवजीका अर्जुनको वरदान देकर अन्तर्धान होना, अर्जुनका आश्रमपर लौटकर भाइयोंसे मिलना, श्रीकृष्णका अर्जुनसे मिलनेके लिये वहाँ पधारना

21. शिव पुराण – शतरुद्र संहिता – 21
शिवजीके द्वादश ज्योतिर्लिंगावतारोंका सविस्तर वर्णन


कोटिरुद्र संहिता

1. शिव पुराण – कोटिरुद्र संहिता – 1
द्वादश ज्योतिर्लिंगों तथा उनके उपलिंगोंका वर्णन एवं उनके दर्शन-पूजनकी महिमा

2. शिव पुराण – कोटिरुद्र संहिता – 2
काशी आदिके विभिन्न लिंगोंका वर्णन तथा अत्रीश्वरकी उत्पत्तिके प्रसंगमें गंगा और शिवके अत्रिके तपोवनमें नित्य निवास करनेकी कथा

3. शिव पुराण – कोटिरुद्र संहिता – 3
ऋषिकापर भगवान् शिवकी कृपा, एक असुरसे उसके धर्मकी रक्षा करके उसके आश्रममें ‘नन्दिकेश’ नामसे निवास करना और वर्षमें एक दिन गंगाका भी वहाँ आना

4. शिव पुराण – कोटिरुद्र संहिता – 4
प्रथम ज्योतिर्लिंग सोमनाथके प्रादुर्भावकी कथा और उसकी महिमा

5. शिव पुराण – कोटिरुद्र संहिता – 5
मल्लिकार्जुन और महाकाल नामक ज्योतिर्लिंगोंके आविर्भावकी कथा तथा उनकी महिमा

6. शिव पुराण – कोटिरुद्र संहिता – 6
महाकालके माहात्म्यके प्रसंगमें शिवभक्त राजा चन्द्रसेन तथा गोप-बालक श्रीकरकी कथा

7. शिव पुराण – कोटिरुद्र संहिता – 7
विन्ध्यकी तपस्या, ओंकारमें परमेश्वरलिंगके प्रादुर्भाव और उसकी महिमाका वर्णन

8. शिव पुराण – कोटिरुद्र संहिता – 8
केदारेश्वर तथा भीमशंकर नामक ज्योतिर्लिंगोंके आविर्भावकी कथा तथा उनके माहात्म्यका वर्णन

9. शिव पुराण – कोटिरुद्र संहिता – 9
विश्वेश्वर ज्योतिर्लिंग और उनकी महिमाके प्रसंगमें पंचक्रोशीकी महत्ताका प्रतिपादन

10. शिव पुराण – कोटिरुद्र संहिता – 10
वाराणसी तथा विश्वेश्वरका माहात्म्य

11. शिव पुराण – कोटिरुद्र संहिता – 11
त्र्यम्बक ज्योतिर्लिंगके प्रसंगमें महर्षि गौतमके द्वारा किये गये परोपकारकी कथा, उनका तपके प्रभावसे अक्षय जल प्राप्त करके ऋषियोंकी अनावृष्टिके कष्टसे रक्षा करना; ऋषियोंका छलपूर्वक उन्हें गोहत्यामें फँसाकर आश्रमसे निकालना और शुद्धिका उपाय बताना

12. शिव पुराण – कोटिरुद्र संहिता – 12
पत्नीसहित गौतमकी आराधनासे संतुष्ट हो भगवान् शिवका उन्हें दर्शन देना, गंगाको वहाँ स्थापित करके स्वयं भी स्थिर होना, देवताओंका वहाँ बृहस्पतिके सिंहराशिपर आनेपर गंगाजीके विशेष माहात्म्यको स्वीकार करना, गंगाका गौतमी (या गोदावरी) नामसे और शिवका त्र्यम्बक ज्योतिर्लिंगके नामसे विख्यात होना तथा इन दोनोंकी महिमा

13. शिव पुराण – कोटिरुद्र संहिता – 13
वैद्यनाथेश्वर ज्योतिर्लिंगके प्राकट्यकी कथा तथा महिमा

14. शिव पुराण – कोटिरुद्र संहिता – 14
नागेश्वर नामक ज्योतिर्लिंगका प्रादुर्भाव और उसकी महिमा

15. शिव पुराण – कोटिरुद्र संहिता – 15
रामेश्वर नामक ज्योतिर्लिंगके आविर्भाव तथा माहात्म्यका वर्णन

16. शिव पुराण – कोटिरुद्र संहिता – 16
घुश्माकी शिवभक्तिसे उसके मरे हुए पुत्रका जीवित होना, घुश्मेश्वर शिवका प्रादुर्भाव तथा उनकी महिमाका वर्णन

17. शिव पुराण – कोटिरुद्र संहिता – 17
शंकरजीकी आराधनासे भगवान् विष्णुको सुदर्शन चक्रकी प्राप्ति तथा उसके द्वारा दैत्योंका संहार

18. शिव पुराण – कोटिरुद्र संहिता – 18
भगवान् विष्णुद्वारा पठित शिवसहस्रनाम-स्तोत्र

19. शिव पुराण – कोटिरुद्र संहिता – 19
भगवान् शिवको संतुष्ट करनेवाले व्रतोंका वर्णन, शिवरात्रि-व्रतकी विधि एवं महिमाका कथन

20. शिव पुराण – कोटिरुद्र संहिता – 20
शिवरात्रि-व्रतके उद्यापनकी विधि

21. शिव पुराण – कोटिरुद्र संहिता – 21
अनजानमें शिवरात्रि-व्रत करनेसे एक भीलपर भगवान् शंकरकी अद्भुत कृपा

22. शिव पुराण – कोटिरुद्र संहिता – 22
मुक्ति और भक्तिके स्वरूपका विवेचन

23. शिव पुराण – कोटिरुद्र संहिता – 23
शिव, विष्णु, रुद्र और ब्रह्माके स्वरूपका विवेचन

24. शिव पुराण – कोटिरुद्र संहिता – 24
शिवसम्बन्धी तत्त्वज्ञानका वर्णन तथा उसकी महिमा, कोटिरुद्रसंहिताका माहात्म्य एवं उपसंहार


उमासंहिता

1. शिव पुराण – उमा संहिता – 1
भगवान् श्रीकृष्णके तपसे संतुष्ट हुए शिव और पार्वतीका उन्हें अभीष्ट वर देना तथा शिवकी महिमा

2. शिव पुराण – उमा संहिता – 2
नरकमें गिरानेवाले पापोंका संक्षिप्त परिचय

3. शिव पुराण – उमा संहिता – 3
पापियों और पुण्यात्माओंकी यमलोकयात्रा

4. शिव पुराण – उमा संहिता – 4
नरकोंकी अट्ठाईस कोटियों तथा प्रत्येकके पाँच-पाँच नायकके क्रमसे एक सौ चालीस रौरवादि नरकोंकी नामावली

5. शिव पुराण – उमा संहिता – 5
विभिन्न पापोंके कारण मिलनेवाली नरकयातनाका वर्णन तथा कुक्कुरबलि, काकबलि एवं देवता आदिके लिये दी हुई बलिकी आवश्यकता एवं महत्ताका प्रतिपादन

6. शिव पुराण – उमा संहिता – 6
यमलोकके मार्गमें सुविधा प्रदान करनेवाले विविध दानोंका वर्णन

7. शिव पुराण – उमा संहिता – 7
जलदान, जलाशय-निर्माण, वृक्षारोपण, सत्य-भाषण और तपकी महिमा

8. शिव पुराण – उमा संहिता – 8
वेद और पुराणोंके स्वाध्याय तथा विविध प्रकारके दानकी महिमा, नरकोंका वर्णन तथा उनमें गिरानेवाले पापोंका दिग्दर्शन, पापोंके लिये सर्वोत्तम प्रायश्चित्त शिवस्मरण तथा ज्ञानके महत्त्वका प्रतिपादन

9. शिव पुराण – उमा संहिता – 9
मृत्युकाल निकट आनेके कौन-कौनसे लक्षण हैं, इसका वर्णन

10. शिव पुराण – उमा संहिता – 10
कालको जीतनेका उपाय, नवधा शब्दब्रह्म एवं तुंकारके अनुसंधान और उससे प्राप्त होनेवाली सिद्धियोंका वर्णन

11. शिव पुराण – उमा संहिता – 11
काल या मृत्युको जीतकर अमरत्व प्राप्त करनेकी चार यौगिक साधनाएँ—प्राणायाम, भ्रूमध्यमें अग्निका ध्यान, मुखसे वायुपान तथा मुड़ी हुई जिह्वाद्वारा गलेकी घाँटीका स्पर्श

12. शिव पुराण – उमा संहिता – 12
भगवती उमाके कालिका-अवतारकी कथा—समाधि और सुरथके समक्ष मेधाका देवीकी कृपासे मधुकैटभके वधका प्रसंग सुनाना

13. शिव पुराण – उमा संहिता – 13
सम्पूर्ण देवताओंके तेजसे देवीका महालक्ष्मीरूपमें अवतार और उनके द्वारा महिषासुरका वध

14. शिव पुराण – उमा संहिता – 14
देवी उमाके शरीरसे सरस्वतीका आविर्भाव, उनके रूपकी प्रशंसा सुनकर शुम्भका उनके पास दूत भेजना, दूतके निराश लौटनेपर शुम्भका क्रमशः धूम्रलोचन, चण्ड, मुण्ड, तथा रक्तबीजको भेजना और देवीके द्वारा उन सबका मारा जाना

15. शिव पुराण – उमा संहिता – 15
देवीके द्वारा सेना और सेनापतियोंसहित निशुम्भ एवं शुम्भका संहार

16. शिव पुराण – उमा संहिता – 16
देवताओंका गर्व दूर करनेके लिये तेजः-पुंजरूपिणी उमाका प्रादुर्भाव

17. शिव पुराण – उमा संहिता – 17
देवीके द्वारा दुर्गमासुरका वध तथा उनके दुर्गा, शताक्षी, शाकम्भरी और भ्रामरी आदि नाम पड़नेका कारण

18. शिव पुराण – उमा संहिता – 18
देवीके क्रियायोगका वर्णन—देवीकी मूर्ति एवं मन्दिरके निर्माण, स्थापन और पूजनका महत्त्व, परा अम्बाकी श्रेष्ठता, विभिन्न मासों और तिथियोंमें देवीके व्रत, उत्सव और पूजन आदिके फल तथा इस संहिताके श्रवण एवं पाठकी महिमा


कैलाससंहिता

1. शिव पुराण – कैलास संहिता – 1
ऋषियोंका सूतजीसे तथा वामदेवजीका स्कन्दसे प्रश्न—प्रणवार्थ-निरूपणके लिये अनुरोध

2. शिव पुराण – कैलास संहिता – 2
प्रणवके वाच्यार्थरूप सदाशिवके स्वरूपका ध्यान, वर्णाश्रम-धर्मके पालनका महत्त्व, ज्ञानमयी पूजा, संन्यासके पूर्वांगभूत नान्दीश्राद्ध एवं ब्रह्मयज्ञ आदिका वर्णन

3. शिव पुराण – कैलास संहिता – 3
संन्यासग्रहणकी शास्त्रीय विधि—गणपति-पूजन, होम, तत्त्व-शुद्धि, सावित्री-प्रवेश, सर्वसंन्यास और दण्ड-धारण आदिका प्रकार

4. शिव पुराण – कैलास संहिता – 4
प्रणवके अर्थोंका विवेचन

5. शिव पुराण – कैलास संहिता – 5
शैवदर्शनके अनुसार शिवतत्त्व, जगत्-प्रपंच और जीवतत्त्वके विषयमें विशद विवेचन तथा शिवसे जीव और जगत्की अभिन्नताका प्रतिपादन

6. शिव पुराण – कैलास संहिता – 6
महावाक्योंके अर्थपर विचार तथा संन्यासियोंके योगपट्टका प्रकार

7. शिव पुराण – कैलास संहिता – 7
यतिके अन्त्यष्टिकर्मकी दशाहपर्यन्त विधिका वर्णन

8. शिव पुराण – कैलास संहिता – 8
यतिके लिये एकादशाह-कृत्यका वर्णन

9. शिव पुराण – कैलास संहिता – 9
यतिके द्वादशाह-कृत्यका वर्णन, स्कन्द और वामदेवका कैलास पर्वतपर जाना तथा सूतजीके द्वारा इस संहिताका उपसंहार


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