Vividh Bhajan

चार दिनों का जीना रे बन्दे

  • Hindi Bhajan
  • चार दिनों का जीना रे बन्दे, गया वक्त नहीं आयेगा।
    सुमिरण कर ले तू प्रभु का, भव सागर तर जायेगा॥
    ये तन है माटी का नश्वर, माटी में मिल जायेगा।
    मुट्ठी बांधे आया था तू, हाथ पसारे जायेगा।
    धन दौलत से भरा खजाना, यहीं पड़ा रह जायेगा॥

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    मन की तरंग मार लो, बस हो गया भजन

    मन की तरंग मार लो, बस हो गया भजन
    आदत बुरी सुधार लो, बस हो गया भजन

    आये हो तुम कहा से, जाओगे तुम कहाँ
    इतना तो दिल विचार लो, बस हो गया भजन

    कोई तुम्हे बुरा कहे, तुम सुनकर करो क्षमा
    वाणी का स्वर सुधार लो, बस हो गया भजन
    मन की तरंग मार लो, बस हो गया भजन

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    इस योग्य हम कहाँ हैं

    इस योग्य हम कहाँ हैं, भगवन तुम्हें मनायें।
    फिर भी मना रहे हैं, शायद तू मान जाये॥
    जबसे जन्म लिया है, विषयोंने हमको घेरा।
    छल और कपटने डाला, इस भोले मन पे डेरा।
    जब तेरा ध्यान लगायें, माया पुकारती है।
    सुख भोगनेकी इच्छा, कभी तृप्त हो न पाये॥
    इस योग्य हम कहाँ हैं, भगवन तुम्हें मनायें।

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    मन्दिर मे रहते हो भगवन

    मन्दिर मे रहते हो भगवन
    कभी बाहर भी आया जाया करो
    मैं रोज़ तेरे दर आता हूँ
    कभी तुम भी मेरे घर आया करो
    मन्दिर मे रहते हो भगवन

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