Prembhushan Maharaj

कैलाश के निवासी नमो बार बार

कैलाश के निवासी नमो बार बार हूँ,
आयो शरण तिहारी भोले तार तार तू
भक्तो को कभी शिव तुने निराश ना किया
माँगा जिन्हें जो चाहा वरदान दे दिया

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है कण कण में झांकी भगवान की

है कण कण में झांकी भगवान् की।
किसी सूझ वाली आँख ने पहचान की॥
निगाह मीरा की निराली, पीली जहर की प्याली,
ऐसा गिरधर बसाया हर श्वास में।

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हम राम जी के, रामजी हमारे हैं

हम राम जी के, राम जी हमारे हैं
हम राम जी के, राम जी हमारे हैं
जो लाखो पापियों को तारे है
जो अधमन को उद्धारे है
हम उनकी शरण पधारे है
हम राम जी के, राम जी हमारे हैं

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मुझे तूने मालिक बहुत कुछ दिया है

मुझे तूने मालिक बहुत कुछ दिया है
तेरा शुक्रिया है, तेरा शुक्रिया है
ना मिलती अगर दी हुई दात तेरी
तो क्या थी ज़माने में औकात मेरी
ये बंदा तो तेरे सहारे जिया है
तेरा शुक्रिया है, तेरा शुक्रिया है

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भज ले प्राणी रे अज्ञानी

Video – प्रेमभूषणजी महाराज (Prembhushan Maharaj)

  • भज ले प्राणी रे अज्ञानी,
    दो दिन की जिंदगानी।
    रे कहाँ तू भटक रहा है, यहाँ क्यों भटक रहा है
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    हमारे साथ श्री रघुनाथ तो किस बात की चिंता

    हमारे साथ श्री रघुनाथ तो किस बात की चिंता
    शरण में रख दिया जब माथ तो किस बात की चिंता
    किया करते हो तुम दिन रात क्यों बिन बात की चिंता
    तेरे स्वामी को रहती है, तेरे हर बात की चिंता

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