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गुरु महिमा - कबीर के दोहे

– गुरु गोविंद दोऊँ खड़े, काके लागूं पांय।
– गुरु आज्ञा मानै नहीं, चलै अटपटी चाल।
– गुरु बिन ज्ञान न उपजै, गुरु बिन मिलै न मोष।
– सतगुरू की महिमा अनंत, अनंत किया उपकार।

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संत कबीर के दोहे - भक्ति + अर्थसहित

– कामी क्रोधी लालची, इनसे भक्ति ना होय।
– भक्ति बिन नहिं निस्तरे, लाख करे जो कोय।
– भक्ति भक्ति सब कोई कहै, भक्ति न जाने भेद।
– भक्ति जु सीढ़ी मुक्ति की, चढ़े भक्त हरषाय।

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या देवी सर्वभूतेषु मंत्र - दुर्गा मंत्र - अर्थ सहित

या देवी सर्वभूतेषु शक्ति-रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
= जो देवी सब प्राणियों में शक्ति रूप में स्थित हैं,
उनको नमस्कार, नमस्कार, बारंबार नमस्कार है।

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भए प्रगट कृपाला, दीनदयाला - अर्थसहित

भए प्रगट कृपाला, दीनदयाला,
कौसल्या हितकारी।
हरषित महतारी, मुनि मन हारी,
अद्भुत रूप बिचारी॥
जब कृपा के सागर कौशल्या के हितकारी दीनदयालु प्रभु प्रकट हुए, तब उनका अद्भुत स्वरुप देखकर माता कौशल्या परम प्रसन्न हुई।

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नाम जाप की महिमा (ब्रम्हाजी ने नारदमुनी को नाम जपकी महिमा बताई)

सूतजी बोले –
हें मुनियो! इस विषयमें मैं पुराना इतिहास सुनाता हूँ। आप सब लोग ध्यान देकर सुनें। इसके श्रवणसे भगवान् श्रीकृष्णमें भक्ति बढ़ती है।

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