Meaning

हनुमान चालीसा - अर्थ सहित - जय हनुमान ज्ञान गुन सागर

जय हनुमान ज्ञान गुण सागर, जय कपीस तिहुं लोक उजागर॥1॥
जय हनुमान – श्री हनुमान जी! आपकी जय हो।
ज्ञान गुण सागर – आप ज्ञान और गुणों के अथाह सागर हो।

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श्री राम आरती - श्रीरामचन्द्र कृपालु भज मन - अर्थ सहित

श्रीरामचन्द्र कृपालु भज मन
हरण भवभय दारुणम्।
नवकंज-लोचन कंज-मुख
कर-कंज पद-कंजारुणम्॥
श्रीरामचन्द्र कृपालु भज मन – हे मन, कृपालु (कृपा करनेवाले, दया करनेवाले) भगवान श्रीरामचंद्रजी का भजन कर

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अयि गिरिनन्दिनि अर्थसहित - महिषासुरमर्दिनी स्तोत्र अर्थ सहित

अयि गिरिनन्दिनि – हे गिरिपुत्री,
नन्दितमेदिनि- पृथ्वी को आनंदित करने वाली,
विश्वविनोदिनि – संसार का मन मुदित रखने वाली,
नन्दिनुते – नंदी द्वारा नमस्कृत,

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शिव तांडव स्तोत्र - अर्थसहित

जटाटवीगलज्जल प्रवाह पावितस्थले
गलेऽवलम्ब्य लम्बितां भुजङ्ग तुङ्ग मालिकाम्।
जो शिव जी डम-डम डमरू बजा कर प्रचण्ड ताण्डव करते हैं,
वे शिवजी हमारा कल्यान करें

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दुर्गा सप्तशती - प्रथम अध्याय

मेधा ऋषि का – राजा सुरथ और समाधि को – भगवती की महिमा बताते हुए – मधु और कैटभ वध का प्रसंग सुनाना।
महाकाली जी का ध्यान मन्त्र
ॐ नमश्चण्डिकायै – ॐ चण्डीदेवीको नमस्कार है।

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दुर्गा सप्तशती - द्वितीय अध्याय

दुर्गा सप्तशती (द्वितीय अध्याय) – अर्थ सहित
देवताओं के तेज से – देवी दुर्गा का प्रादुर्भाव और – महिषासुर की सेना का वध
महिषासुर-मर्दिनी भगवती महालक्ष्मीका का ध्यान मन्त्र

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दुर्गा सप्तशती - तृतीय अध्याय

दुर्गा सप्तशती (तृतीय अध्याय) – अर्थ सहित
सेनापतियोंसहित महिषासुर का वध
उनके मस्तकपर चन्द्रमाके साथ ही रत्नमय मुकुट बँधा है तथा वे कमलके आसन पर विराजमान हैं। ऐसी देवीको मैं भक्तिपूर्वक प्रणाम करता हूँ।

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