Durga Bhajan 1

या देवी सर्वभूतेषु मंत्र - दुर्गा मंत्र - अर्थ सहित

या देवी सर्वभूतेषु शक्ति-रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
= जो देवी सब प्राणियों में शक्ति रूप में स्थित हैं,
उनको नमस्कार, नमस्कार, बारंबार नमस्कार है।

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जगजननी जय जय माँ, जगजननी जय जय - अर्थसहित

जगजननी – समस्त संसारकी माता
जय जय माँ – सदा सर्वदा आपकी जय हो
भयहारिणी – संसारके समस्त भयको (कष्टोंको) हरनेवाली,
भवतारिणी – संसारका उद्धार करनेवाली एवं
भवभामिनि – संसारको सुशोभित करनेवाली सर्वसुंदरी,
जय जय – जगत् माता! आपकी जय हो॥

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दुर्गा सप्तशती - प्रथम अध्याय

मेधा ऋषि का – राजा सुरथ और समाधि को – भगवती की महिमा बताते हुए – मधु और कैटभ वध का प्रसंग सुनाना।
महाकाली जी का ध्यान मन्त्र
ॐ नमश्चण्डिकायै – ॐ चण्डीदेवीको नमस्कार है।

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माँ दुर्गा के 108 नाम - अर्थसहित

अनन्ता: जिनके स्वरूप का कहीं अन्त नहीं
अभव्या : जिससे बढ़कर भव्य कुछ नहीं
महिषासुर-मर्दिनि: महिषासुर का वध करने वाली
सर्वासुरविनाशा: सभी राक्षसों का नाश करने वाली
माहेश्वरी: प्रभु शिव की शक्ति

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