Devi Aarti

या देवी सर्वभूतेषु मंत्र - दुर्गा मंत्र - अर्थ सहित

या देवी सर्वभूतेषु शक्ति-रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
= जो देवी सब प्राणियों में शक्ति रूप में स्थित हैं,
उनको नमस्कार, नमस्कार, बारंबार नमस्कार है।

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Durga Aarti - Jai Ambe Gauri

Jai Ambe Gauri, Maiya Jai Shyama Gauri
Tumko nishadin dhyavat, Hari Brahma Shivari
Shri Ambeji ki arati, jo koi nar gave
Kahat Shivanand swami, sukh sampatti pave
Maiya Jai Ambe Gauri

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जगजननी जय जय माँ, जगजननी जय जय - अर्थसहित

जगजननी – समस्त संसारकी माता
जय जय माँ – सदा सर्वदा आपकी जय हो
भयहारिणी – संसारके समस्त भयको (कष्टोंको) हरनेवाली,
भवतारिणी – संसारका उद्धार करनेवाली एवं
भवभामिनि – संसारको सुशोभित करनेवाली सर्वसुंदरी,
जय जय – जगत् माता! आपकी जय हो॥

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