Tag: Bhakti Geet

अच्युतम केशवं कृष्ण दामोदरं

अच्युतम केशवं कृष्ण दामोदरं,
राम नारायणं जानकी वल्लभं॥
कौन कहता है भगवान आते नहीं,
तुम मीरा के जैसे बुलाते नहीं।
कौन कहता है भगवान खाते नहीं,
बेर शबरी के जैसे खिलाते नहीं।

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नन्द के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की

आनंद उमंग भयो, जय हो नन्द लाल की।
नन्द के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की॥
बृज में आनंद भयो, जय यशोदा लाल की।
हाथी घोडा पालकी, जय कन्हैया लाल की॥
जय हो नंदलाल की, जय यशोदा लाल की।
हाथी घोडा पालकी, जय कन्हैया लाल की॥

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मधुराष्टकम - अर्थ साहित - अधरं मधुरं वदनं मधुरं

अधरं मधुरं वदनं मधुरं,
नयनं मधुरं हसितं मधुरम्।
हृदयं मधुरं गमनं मधुरं,
मधुराधिपतेरखिलं मधुरम्॥
अधरं मधुरं – श्री कृष्ण के होंठ मधुर हैं
वदनं मधुरं – मुख मधुर है
नयनं मधुरं – नेत्र (ऑंखें) मधुर हैं
हसितं मधुरम् – मुस्कान मधुर है

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मैं आरती तेरी गाउँ, ओ केशव कुञ्ज बिहारी

मैं आरती तेरी गाउँ, ओ केशव कुञ्ज बिहारी।
मैं नित नित शीश नवाऊँ, ओ मोहन कृष्ण मुरारी॥
जो आए शरण तिहारी, विपदा मिट जाए सारी।
हम सब पर कृपा रखना, ओ जगत के पालनहारी॥

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जगजननी जय जय माँ, जगजननी जय जय

जगजननी – समस्त संसारकी माता
जय जय माँ – सदा सर्वदा आपकी जय हो
भयहारिणी – संसारके समस्त भयको (कष्टोंको) हरनेवाली,
भवतारिणी – संसारका उद्धार करनेवाली एवं
भवभामिनि – संसारको सुशोभित करनेवाली सर्वसुंदरी,
जय जय – जगत् माता! आपकी जय हो॥

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मैया मै निहाल हो गया

सब करदी मुरादे पूरी
मैया मै निहाल हो गया।
मैया दयावान तूने दिया दोनों हाथो से
इतना की झोली ना समाया है।

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