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मुकुंदा मुकुंदा, कृष्णा मुकुंदा मुकुंदा - कृष्णा भक्ति गीत

मुकुंदा मुकुंदा, कृष्णा मुकुंदा मुकुंदा
मुझे दान में दे वृंदा, विरिन्दा विरिन्दा।
मटकी से माखन फिर से चुरा,
गोपियों का विरह तू आके मिटा॥

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मधुराष्टकम - अर्थ साहित - अधरं मधुरं वदनं मधुरं

अधरं मधुरं वदनं मधुरं,
नयनं मधुरं हसितं मधुरम्।
हृदयं मधुरं गमनं मधुरं,
मधुराधिपतेरखिलं मधुरम्॥
अधरं मधुरं – श्री कृष्ण के होंठ मधुर हैं
वदनं मधुरं – मुख मधुर है
नयनं मधुरं – नेत्र (ऑंखें) मधुर हैं
हसितं मधुरम् – मुस्कान मधुर है

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मैं आरती तेरी गाउँ, ओ केशव कुञ्ज बिहारी

मैं आरती तेरी गाउँ, ओ केशव कुञ्ज बिहारी।
मैं नित नित शीश नवाऊँ, ओ मोहन कृष्ण मुरारी॥
जो आए शरण तिहारी, विपदा मिट जाए सारी।
हम सब पर कृपा रखना, ओ जगत के पालनहारी॥

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