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हनुमान चालीसा - अर्थ सहित - जय हनुमान ज्ञान गुन सागर

जय हनुमान ज्ञान गुण सागर, जय कपीस तिहुं लोक उजागर॥1॥
जय हनुमान – श्री हनुमान जी! आपकी जय हो।
ज्ञान गुण सागर – आप ज्ञान और गुणों के अथाह सागर हो।

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है कण कण में झांकी भगवान की

है कण कण में झांकी भगवान् की।
किसी सूझ वाली आँख ने पहचान की॥
निगाह मीरा की निराली, पीली जहर की प्याली,
ऐसा गिरधर बसाया हर श्वास में।

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