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दया कर, दान भक्ति का

दया कर, दान भक्ति का, हमें परमात्मा देना।
दया करना, हमारी आत्मा को शुद्धता देना॥
हमारे ध्यान में आओ, प्रभु आँखों में बस जाओ।
अंधेरे दिल में आकर के परम ज्योति जगा देना॥

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दुर्गा सप्तशती - प्रथम अध्याय

मेधा ऋषि का – राजा सुरथ और समाधि को – भगवती की महिमा बताते हुए – मधु और कैटभ वध का प्रसंग सुनाना।
महाकाली जी का ध्यान मन्त्र
ॐ नमश्चण्डिकायै – ॐ चण्डीदेवीको नमस्कार है।

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दुर्गा सप्तशती - द्वितीय अध्याय

दुर्गा सप्तशती (द्वितीय अध्याय) – अर्थ सहित
देवताओं के तेज से – देवी दुर्गा का प्रादुर्भाव और – महिषासुर की सेना का वध
महिषासुर-मर्दिनी भगवती महालक्ष्मीका का ध्यान मन्त्र

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दुर्गा सप्तशती - तृतीय अध्याय

दुर्गा सप्तशती (तृतीय अध्याय) – अर्थ सहित
सेनापतियोंसहित महिषासुर का वध
उनके मस्तकपर चन्द्रमाके साथ ही रत्नमय मुकुट बँधा है तथा वे कमलके आसन पर विराजमान हैं। ऐसी देवीको मैं भक्तिपूर्वक प्रणाम करता हूँ।

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दुर्गा सप्तशती - चौथा अध्याय

श्री दुर्गा सप्तशती (चौथा अध्याय) – अर्थ सहित
इन्द्रादि देवताओं द्वारा देवीकी स्तुति
चण्डिके! पूर्व, पश्चिम और दक्षिण दिशामें आप हमारी रक्षा करें तथा
ईश्वरि! अपने त्रिशूलको घुमाकर आप उत्तर दिशामें भी हमारी रक्षा करें।

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दुर्गा सप्तशती - पाँचवाँ अध्याय

पाँचवाँ अध्याय (श्री दुर्गा सप्तशती) – अर्थ सहित
देवताओंद्वारा देवीकी स्तुति,
या देवी सर्वभूतेषु बुद्धिरूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै, नमस्तस्यै, नमस्तस्यै नमो नमः

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दुर्गा सप्तशती - छठा अध्याय

छठा अध्याय (श्री दुर्गा सप्तशती) – अर्थ सहित
धूम्रलोचन-वध
देवीने धूम्रलोचन असुरको मार डाला तथा उसके सिंहने सारी सेनाका सफाया कर डाला

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दुर्गा सप्तशती - सातवा अध्याय

सातवा अध्याय (श्री दुर्गा सप्तशती) – अर्थ सहित
चण्ड और मुण्डका वध
देवि! तुम चंड और मुंड को लेकर मेरे पास आयी हो,
इसलिए संसार में चांमुडा के नाम से तुम्हारी ख्याति होगी।

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