Shiv Manas Puja – Meaning – Hindi

Shri Rameshbhai Oza

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Shiv Manas Puja – Meaning in Hindi


रत्नैः कल्पितमासनं हिमजलैः
स्नानं च दिव्याम्बरं
नानारत्नविभूषितं मृगमदा
मोदाङ्कितं चन्दनम्।

जाती-चम्पक-बिल्व-पत्र-रचितं
पुष्पं च धूपं तथा
दीपं देव दयानिधे पशुपते
हृत्कल्पितं गृह्यताम्॥

अर्थ (Stotra Meaning in Hindi):

  • रत्नैः कल्पितमासनं – यह रत्ननिर्मित सिंहासन,
  • हिमजलैः स्नानं – शीतल जल से स्नान,
  • च दिव्याम्बरं नानारत्नविभूषितं – तथा नाना रत्ना से विभूषित दिव्य वस्त्र,
  • मृगमदा मोदाङ्कितं चन्दनम् – कस्तूरि गन्ध समन्वित चन्दन,
  • जाती-चम्पक – जूही, चम्पा और
  • बिल्वपत्र-रचितं पुष्पं – बिल्वपत्रसे रचित पुष्पांजलि
  • च धूपं तथा दीपं – तथा धूप और दीप
  • देव दयानिधे पशुपते – हे देव, हे दयानिधे, हे पशुपते,
  • हृत्कल्पितं गृह्यताम् – यह सब मानसिक (मनके द्वारा) पूजोपहार ग्रहण कीजिये

भावार्थ:

हे देव, हे दयानिधे, हे पशुपते, यह रत्ननिर्मित सिंहासन, शीतल जल से स्नान, नाना रत्ना से विभूषित दिव्य वस्त्र, कस्तूरि आदि गन्ध से समन्वित चन्दन, जूही, चम्पा और बिल्वपत्रसे रचित पुष्पांजलि तथा धूप और दीप – यह सब मानसिक [पूजोपहार] ग्रहण कीजिये

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सौवर्णे नवरत्न-खण्ड-रचिते
पात्रे घृतं पायसं
भक्ष्यं पञ्च-विधं पयो-दधि-युतं
रम्भाफलं पानकम्।

शाकानामयुतं जलं रुचिकरं
कर्पूर-खण्डोज्ज्वलं
ताम्बूलं मनसा मया विरचितं
भक्त्या प्रभो स्वीकुरु॥

अर्थ (Stotra Meaning in Hindi):

  • सौवर्णे नवरत्न-खण्ड-रचिते पात्रे – नवीन रत्नखण्डोंसे जडित सुवर्णपात्र में
  • घृतं पायसं – घृतयुक्त खीर, (घृत – घी)
  • भक्ष्यं पञ्च-विधं पयो-दधि-युतं – दूध और दधिसहित पांच प्रकार का व्यंजन,
  • रम्भाफलं पानकम् – कदलीफल, शरबत,
  • शाकानामयुतं जलं रुचिकरं कर्पूर-खण्डोज्ज्वलं – अनेकों शाक, कपूरसे सुवासित और स्वच्छ किया हुआ मीठा जल
  • ताम्बूलं – तथा ताम्बूल (पान)
  • मनसा मया विरचितं – ये सब मनके द्वारा ही बनाकर प्रस्तुत किये हैं
  • भक्त्या प्रभो स्वीकुरु – हे प्रभो, कृपया इन्हें स्वीकार कीजिये

भावार्थ:

मैंने नवीन रत्नखण्डोंसे जड़ित सुवर्णपात्र में घृतयुक्त खीर, दूध और दधिसहित पांच प्रकार का व्यंजन, कदलीफल, शरबत, अनेकों शाक, कपूरसे सुवासित और स्वच्छ किया हुआ मीठा जल तथा ताम्बूल – ये सब मनके द्वारा ही बनाकर प्रस्तुत किये हैं। हे प्रभो, कृपया इन्हें स्वीकार कीजिये

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छत्रं चामरयोर्युगं व्यजनकं
चादर्शकं निर्मलम्
वीणा-भेरि-मृदङ्ग-काहलकला
गीतं च नृत्यं तथा।

साष्टाङ्गं प्रणतिः स्तुतिर्बहुविधा
ह्येतत्समस्तं मया
संकल्पेन समर्पितं तव विभो
पूजां गृहाण प्रभो॥

अर्थ (Stotra Meaning in Hindi):

  • छत्रं चामरयोर्युगं व्यजनकं – छत्र, दो चँवर, पंखा,
  • चादर्शकं निर्मलम् – निर्मल दर्पण,
  • वीणा-भेरि-मृदङ्ग-काहलकला – वीणा, भेरी, मृदंग, दुन्दुभी के वाद्य,
  • गीतं च नृत्यं तथा – गान और नृत्य तथा
  • साष्टाङ्गं प्रणतिः स्तुतिर्बहुविधा – साष्टांग प्रणाम, नानाविधि स्तुति
  • ह्येतत्समस्तं मया संकल्पेन – ये सब मैं संकल्पसे ही
  • समर्पितं तव विभो – आपको समर्पण करता हूँ
  • पूजां गृहाण प्रभो – हे प्रभो, मेरी यह पूजा ग्रहण कीजिये

भावार्थ:

छत्र, दो चँवर, पंखा, निर्मल दर्पण, वीणा, भेरी, मृदंग, दुन्दुभी के वाद्य, गान और नृत्य, साष्टांग प्रणाम, नानाविधि स्तुति – ये सब मैं संकल्पसे ही आपको समर्पण करता हूँ। हे प्रभु, मेरी यह पूजा ग्रहण कीजिये।

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आत्मा त्वं गिरिजा मतिः सहचराः
प्राणाः शरीरं गृहं
पूजा ते विषयोपभोग-रचना
निद्रा समाधि-स्थितिः।

सञ्चारः पदयोः प्रदक्षिणविधिः
स्तोत्राणि सर्वा गिरो
यद्यत्कर्म करोमि तत्तदखिलं
शम्भो तवाराधनम्॥

अर्थ (Stotra Meaning in Hindi):

  • आत्मा त्वं – मेरी आत्मा तुम हो,
  • गिरिजा मतिः – बुद्धि पार्वतीजी हैं,
  • सहचराः प्राणाः – प्राण आपके गण हैं,
  • शरीरं गृहं – शरीर आपका मन्दिर है
  • पूजा ते विषयोपभोग-रचना – सम्पूर्ण विषयभोगकी रचना आपकी पूजा है,
  • निद्रा समाधि-स्थितिः – निद्रा समाधि है,
  • सञ्चारः पदयोः प्रदक्षिणविधिः – मेरा चलना-फिरना आपकी परिक्रमा है तथा
  • स्तोत्राणि सर्वा गिरो – सम्पूर्ण शब्द आपके स्तोत्र हैं
  • यत्कर्म करोमि तत्तदखिलं – इस प्रकार मैं जो-जो कार्य करता हूँ,
  • शम्भो तवाराधनम् – हे शम्भो, वह सब आपकी आराधना ही है

भावार्थ:

हे शम्भो, मेरी आत्मा तुम हो, बुद्धि पार्वतीजी हैं, प्राण आपके गण हैं, शरीर आपका मन्दिर है, सम्पूर्ण विषयभोगकी रचना आपकी पूजा है, निद्रा समाधि है, मेरा चलना-फिरना आपकी परिक्रमा है तथा सम्पूर्ण शब्द आपके स्तोत्र हैं। इस प्रकार मैं जो-जो कार्य करता हूँ, वह सब आपकी आराधना ही है।

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कर-चरण-कृतं वाक् कायजं कर्मजं वा
श्रवण-नयनजं वा मानसं वापराधम्।

विहितमविहितं वा सर्वमेतत्-क्षमस्व
जय जय करुणाब्धे श्री महादेव शम्भो॥

अर्थ (Stotra Meaning in Hindi):

  • कर-चरण-कृतं वाक् – हाथोंसे, पैरोंसे, वाणीसे,
  • कायजं कर्मजं वा – शरीरसे, कर्मसे,
  • श्रवण-नयनजं वा – कर्णोंसे, नेत्रोंसे अथवा
  • मानसं वापराधम् – मनसे भी जो अपराध किये हों,
  • विहितमविहितं वा – वे विहित हों अथवा अविहित,
  • सर्वमेतत्-क्षमस्व – उन सबको हे शम्भो आप क्षमा कीजिये
  • जय जय करुणाब्धे श्री महादेव शम्भो – हे करुणासागर, हे महादेव शम्भो, आपकी जय हो, जय हो

भावार्थ:

हाथोंसे, पैरोंसे, वाणीसे, शरीरसे, कर्मसे, कर्णोंसे, नेत्रोंसे अथवा मनसे भी जो अपराध किये हों, वे विहित हों अथवा अविहित, उन सबको हे करुणासागर महादेव शम्भो। आप क्षमा कीजिये। हे महादेव शम्भो, आपकी जय हो, जय हो।

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Shiv Bhajans

  • Shiv Panchakshar Stotra – Meaning – Hindi
    नागेंद्रहाराय त्रिलोचनाय
    भस्मांग रागाय महेश्वराय।
    पंचाक्षरमिदं पुण्यं यः – जो कोई शिव के इस पंचाक्षर मंत्र का
    पठेत् शिव सन्निधौ – नित्य ध्यान करता है
  • Om Jai Shiv Omkara – Shiv Aarti
    जय शिव ओंकारा, ओम जय शिव ओंकारा।
    ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा॥
    ॥ओम जय शिव ओंकारा॥
  • Maha Mrityunjaya Mantra – Meaning in Hindi
    ॐ त्र्यम्बकं यजामहे
    सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
    उर्वारुकमिव बन्धनान्
    मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्॥
  • Jai Girijapati Deen Dayala – Shiv Chalisa
    जय गिरिजा पति दीन दयाला।
    सदा करत सन्तन प्रतिपाला॥
    भाल चन्द्रमा सोहत नीके।
    कानन कुण्डल नागफनी के॥
  • Subah Subah Le Shiv Ka Naam
    सुबह सुबह ले शिव का नाम,
    कर ले बन्दे यह शुभ काम
    ओम नमः शिवाय, ओम नमः शिवाय
    ओम नमः शिवाय, ओम नमः शिवाय
  • Shiv Rudrashtakam Stotra – with Meaning in Hindi
    नमामीशमीशान निर्वाणरूपं
    विभुं व्यापकं ब्रह्मवेदस्वरूपम्।
    निराकार – निराकार स्वरुप
    ओमङ्कारमूलं – ओंकार के मूल
  • Shiv Panchakshar Stotra – Nagendra haraya Trilochanaya
    नागेंद्रहाराय त्रिलोचनाय
    भस्मांग रागाय महेश्वराय।
    नित्याय शुद्धाय दिगंबराय
    तस्मै न काराय नमः शिवायः॥
  • Shri Badrinath Stuti – Badrinath Aarti
    पवन मंद सुगंध शीतल,
    हेम मंदिर शोभितम्।
    निकट गंगा बहती निर्मल,
    श्री बद्रीनाथ विश्व्म्भरम्॥
  • Shiv Shadakshar Stotra – Hindi
    ॐ कारं बिंदुसंयुक्तं
    नित्यं ध्यायंति योगिन:।
    कामदं मोक्षदं चैव
    ॐकाराय नमो नम: ॥
  • Shiv Tandav Stotra
    जटाटवीगलज्जल प्रवाह पावितस्थले
    गलेऽवलम्ब्य लम्बितां भुजङ्ग तुङ्ग मालिकाम्।
    डमड्डमड्डमड्डमन्निनाद वड्डमर्वयं
    चकार चण्डताण्डवं तनोतु नः शिवः शिवम्॥
  • Jyotirlinga Stotram with Meaning
    सौराष्ट्रे सोमनाथं च
    श्रीशैले मल्लिकार्जुनम्।
    उज्जयिन्यां महाकालं
    ओम्कारममलेश्वरम्॥
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Bhajan List

Shiv Bhajans – Hindi
Shiv Stotra
Bhajan, Aarti, Chalisa, Dohe – Hindi List

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Shiv Bhajan Lyrics

  • Kailash Ke Nivasi Namo
    कैलाश के निवासी नमो बार बार हूँ,
    आयो शरण तिहारी भोले तार तार तू
    भक्तो को कभी शिव तुने निराश ना किया
    माँगा जिन्हें जो चाहा वरदान दे दिया
  • Satyam Shivam Sundaram
    इश्वर सत्य है, सत्य ही शिव है, शिव ही सुन्दर है
    जागो उठ कर देखो, जीवन ज्योत उजागर है
    सत्यम शिवम सुन्दरम, सत्यम शिवम् सुन्दरम
  • Aisi Subah Na Aaye, Aaye Na Aisi Shaam
    ऐसी सुबह ना आए, आए ना ऐसी शाम।
    जिस दिन जुबा पे मेरी आए ना शिव का नाम॥
    मन मंदिर में वास है तेरा, तेरी छवि बसाई।
    प्यासी आत्मा बनके जोगन, तेरी शरण में आई।
    ॐ नमः शिवाय, ॐ नमः शिवाय
  • Aao Mahima Gaye Bhole Nath Ki
    आओ महिमा गाए भोले नाथ की
    भक्ति में खो जाए भोले नाथ की
    भोले नाथ की जय, शम्भू नाथ की जय
    गौरी नाथ की जय, दीना नाथ की जय
  • Bigdi Meri Bana Do Mere Baba Bhole
    बिगड़ी मेरी बना दो, दुःख दर्द सब मिटा दो,
    दुःख सब के हरने वाले, मेरे बाबा भोले भाले,
    मेरे शम्भू भोले भाले
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Bhajans and Aarti

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Bhakti Geet Lyrics

  • Suraj Ki Garmi Se Jalte Huye Tan Ko
    सूरज की गर्मी से जलते हुए तन को
    मिल जाये तरुवर की छाया।
    ऐसा ही सुख मेरे मन को मिला है,
    मैं जब से शरण तेरी आया, मेरे राम॥
  • Sunderkand – 01
    जामवंत के बचन सुहाए।
    सुनि हनुमंत हृदय अति भाए॥
    तब लगि मोहि परिखेहु तुम्ह भाई।
    सहि दुख कंद मूल फल खाई॥
    जाम्बवान के सुहावने वचन सुनकर हनुमानजी को अपने मन में वे वचन बहुत अच्छे लगे॥
  • Shri Radhe Govinda Man Bhaj Le – 2 Versions
    Shri Radhe Govinda, man bhaj le
    Hari ka pyara naam hai
    Gopala Hari ka pyaara naam hai,
    Nandlala Hari ka pyaara naam hai
  • Navdurga – Nine forms of Goddess Durga
    नवरात्रि में दुर्गा पूजा के अवसर पर माँ के नौ रूपों की पूजा-उपासना की जाती है। इन नव दुर्गा को पापों के विनाशिनी कहा जाता है।
    शैलपुत्री (Shailaputri)
    व्रह्मचारणी (Brahmacharini)
    चन्द्रघन्टा (Candraghanta)
    कूष्माण्डा (Kusamanda)
    स्कन्दमाता (Skandamata)
  • Shri Ramchandra Kripalu Bhajman – Meaning
    श्रीरामचन्द्र कृपालु भज मन
    हरण भवभय दारुणम्।
    नवकंज-लोचन कंज-मुख
    कर-कंज पद-कंजारुणम्॥
    श्रीरामचन्द्र कृपालु भज मन - हे मन, कृपालु (कृपा करनेवाले, दया करनेवाले) भगवान श्रीरामचंद्रजी का भजन कर
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