Shiv Rudrashtakam Stotra – with Meaning in Hindi

शिव रुद्राष्टकम - अर्थ सहित

नमामीशमीशान निर्वाणरूपं
विभुं व्यापकं ब्रह्मवेद स्वरूपम्।
निजं निर्गुणं निर्विकल्पं निरीहं
चिदाकाशमाकाशवासं भजेहम्॥

Shri Rameshbhai Oza

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Rudrashtakam – Meaning in Hindi


नमामीशमीशान निर्वाणरूपं
विभुं व्यापकं ब्रह्मवेदस्वरूपम्।
निजं निर्गुणं निर्विकल्पं निरीहं
चिदाकाशमाकाशवासं भजेहम्॥

अर्थ (Stotra Meaning in Hindi):

  • नमामीशम् – श्री शिवजी, मैं आपको नमस्कार करता हूँ जो
  • ईशान – ईशान दिशाके ईश्वर
  • निर्वाणरूपं – मोक्षस्वरुप
  • विभुं व्यापकं – सर्व्यवापी
  • ब्रह्मवेदस्वरूपम् – ब्रह्म और वेदस्वरूप है
  • निजं – निजस्वरुप में स्थित (अर्थात माया आदि से रहित)
  • निर्गुणं – गुणों से रहित
  • निर्विकल्पं – भेद रहित
  • निरीहं – इच्छा रहित
  • चिदाकाशम् – चेतन आकाशरूप एवं
  • आकाशवासं – आकाश को ही वस्त्र रूप में धारण करने वाले (अथवा आकाश को भी आच्छादित करने वाले)
  • भजेहम् – हे शिव, आपको में भजता हूँ

भावार्थ:

हे मोक्षस्वरुप विभु, व्यापक, ब्रह्म और वेदस्वरूप, ईशान दिशाके ईश्वर तथा सबके स्वामी श्री शिवजी, मैं आपको नमस्कार करता हूँ।
निजस्वरुप में स्थित (अर्थात मायादिरहित), गुणों से रहित, भेद रहित, इच्छा रहित चेतन आकाशरूप एवं आकाश को ही वस्त्र रूप में धारण करने वाले दीगम्बर (अथवा आकाश को भी आच्छादित करने वाले), आपको में भजता हूँ ॥१॥

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निराकारमोङ्कारमूलं तुरीयं
गिराज्ञानगोतीतमीशं गिरीशम्।
करालं महाकालकालं कृपालं
गुणागारसंसारपारं नतोहम्॥

अर्थ (Stotra Meaning in Hindi):

  • निराकार – निराकार स्वरुप
  • ओमङ्कारमूलं – ओंकार के मूल
  • तुरीयं – तीनों गुणों से अतीत
  • गिराज्ञानगोतीतमीशं – वाणी, ज्ञान और इन्द्रियों से परे
  • गिरीशम् – कैलाशपति
  • करालं – विकराल
  • महाकालकालं – महाकाल के काल
  • कृपालं – कृपालु
  • गुणागार – गुणों के धाम
  • संसारपारं – संसार से परे
  • नतोहम् – परमेश्वर को मैं नमस्कार करता हूँ

भावार्थ:

निराकार, ओंकार के मूल, तुरीय (तीनों गुणों से अतीत), वाणी, ज्ञान और इन्द्रियों से पर, कैलाशपति, विकराल, महाकाल के काल कृपालु, गुणों के धाम, संसार से परे आप परमेश्वर को मैं नमस्कार करता हूँ ॥२॥

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तुषाराद्रिसंकाशगौरं गभिरं
मनोभूतकोटिप्रभाश्री शरीरम्।
स्फुरन्मौलिकल्लोलिनी चारुगङ्गा
लसद्भालबालेन्दु कण्ठे भुजङ्गा॥

अर्थ (Stotra Meaning in Hindi):

  • तुषाराद्रिसंकाशगौरं गभिरं – जो हिमाचल के समान गौरवर्ण तथा गंभीर हैं
  • मनोभूतकोटिप्रभाश्री शरीरम् – जिनके शरीर में करोड़ों कामदेवों की ज्योति एवं शोभा है
  • स्फुरन्मौलिकल्लोलिनी चारुगङ्गा – जिनके सिरपर सुन्दर नदी गंगा जी विराजमान हैं
  • लसद्भालबालेन्दु – जिनके ललाटपर द्वितीय का चन्द्रमा और
  • कण्ठे भुजङ्गा – गले में सर्प सुशोभित हैं

भावार्थ:

जो हिमाचल के समान गौरवर्ण तथा गंभीर हैं, जिनके शरीर में करोड़ों कामदेवों की ज्योति एवं शोभा है, जिनके सिरपर सुन्दर नदी गंगा जी विराजमान हैं, जिनके ललाटपर द्वितीय का चन्द्रमा और गले में सर्प सुशोभित हैं ॥३॥

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चलत्कुण्डलं भ्रूसुनेत्रं विशालं
प्रसन्नाननं नीलकण्ठं दयालम्।
मृगाधीशचर्माम्बरं मुण्डमालं
प्रियं शङ्करं सर्वनाथं भजामि॥

अर्थ (Stotra Meaning in Hindi):

  • चलत्कुण्डलं – जिनके कानों में कुण्डल हिल रहे हैं
  • भ्रूसुनेत्रं विशालं – सुन्दर भृकुटि और विशाल नेत्र हैं
  • प्रसन्नाननं – जो प्रसन्नमुख
  • नीलकण्ठं – नीलकंठ और
  • दयालम् – दयालु हैं
  • मृगाधीशचर्माम्बरं – सिंहचर्म का वस्त्र धारण किये और
  • मुण्डमालं – मुण्डमाला पहने हैं
  • प्रियं शङ्करं – उन सबके प्यारे और
  • सर्वनाथं – सबके नाथ (कल्याण करने वाले) श्री शंकर जी को
  • भजामि – मैं भजता हूँ

भावार्थ:

जिनके कानों में कुण्डल हिल रहे हैं, सुन्दर भ्रुकुटी और विशाल नेत्र हैं, जो प्रसन्नमुख, नीलकंठ और दयालु हैं, सिंहचर्म का वस्त्र धारण किये और मुण्डमाला पहने हैं, उन सबके प्यारे और सबके नाथ (कल्याण करने वाले) श्री शंकर जी को मैं भजता हूँ ॥४॥

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प्रचण्डं प्रकृष्टं प्रगल्भं परेशं
अखण्डं अजं भानुकोटिप्रकाशं।
त्र्यःशूलनिर्मूलनं शूलपाणिं
भजेहं भवानीपतिं भावगम्यम्॥

अर्थ (Stotra Meaning in Hindi):

  • प्रचण्डं प्रकृष्टं प्रगल्भं परेशं – प्रचंड (रुद्ररूप) श्रेष्ठ, तेजस्वी, परमेश्वर
  • अखण्डं – अखंड
  • अजं – अजन्मा
  • भानुकोटिप्रकाशं – करोड़ों सूर्यों के समान प्रकाश वाले
  • त्र्यःशूलनिर्मूलनं – तीनों प्रकार के शूलों (दुखों) को निर्मूल करने वाले
  • शूलपाणिं – हाथ में त्रिशूल धारण किये हुए
  • भजेहं – मैं भजता हूँ
  • भवानीपतिं – भवानी के पति श्री शंकर
  • भावगम्यम् – भाव (प्रेम) के द्वारा प्राप्त होने वाले

भावार्थ:

प्रचंड (रुद्ररूप) श्रेष्ठ, तेजस्वी, परमेश्वर, अखंड, अजन्मा, करोड़ों सूर्यों के समान प्रकाश वाले, तीनों प्रकार के शूलों (दुखों) को निर्मूल करने वाले, हाथ में त्रिशूल धारण किये हुए, भाव (प्रेम) के द्वारा प्राप्त होने वाले भवानी के पति श्री शंकर जी को मैं भजता हूँ ॥५॥

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कलातीतकल्याण कल्पान्तकारी
सदा सज्जनानन्ददाता पुरारी॥
चिदानन्दसंदोह मोहापहारी
प्रसीद प्रसीद प्रभो मन्मथारी॥

अर्थ (Stotra Meaning in Hindi):

  • कलातीत – कलाओं से परे
  • कल्याण – कल्याण स्वरुप
  • कल्पान्तकारी – कल्पका अंत (प्रलय) करने वाले
  • सदा सज्जनानन्ददाता – सज्जनों को सदा आनंद देने वाले
  • पुरारी – त्रिपुर के शत्रु
  • चिदानन्दसंदोह – सच्चिदानन्दघन
  • मोहापहारी – मोहको हराने वाले
  • प्रसीद प्रसीद प्रभो – कामदेव के शत्रु, हे प्रभु, प्रसन्न होइये
  • मन्मथारी – मनको मथ डालने वाले

भावार्थ:

कलाओं से परे, कल्याण स्वरुप, कल्पका अंत (प्रलय) करने वाले, सज्जनों को सदा आनंद देने वाले, त्रिपुर के शत्रु, सच्चिदानन्दघन, मोहको हराने वाले, मनको मथ डालने वाले, कामदेव के शत्रु, हे प्रभु, प्रसन्न होइये ॥६॥

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न यावद् उमानाथपादारविन्दं
भजन्तीह लोके परे वा नराणाम्।
न तावत्सुखं शान्ति सन्तापनाशं
प्रसीद प्रभो सर्वभूताधिवासं॥

अर्थ (Stotra Meaning in Hindi):

  • न यावद् उमानाथपादारविन्दं – जबतक पार्वती के पति (शिवजी) आपके चरणकमलों को
  • भजन्तीह – मनुष्य नहीं भजते
  • लोके परे वा नराणाम् – तबतक उन्हें इसलोक में या परलोक में
  • न तावत्सुखं शान्ति – न सुख-शान्ति मिलती है और
  • सन्तापनाशं – न उनके तापों का नाश होता है
  • प्रसीद प्रभो – प्रभो। प्रसन्न होइये
  • सर्वभूताधिवासं – समस्त जीवों के अन्दर (हृदय में) निवास करनेवाले

भावार्थ:

जबतक पार्वती के पति आपके चरणकमलों को मनुष्य नहीं भजते, तबतक उन्हें न तो इसलोक ओर परलोक में सुख-शान्ति मिलती है और न उनके तापों का नाश होता है। अत: हे समस्त जीवों के अन्दर (हृदय में) निवास करनेवाले प्रभो, प्रसन्न होइये ॥७॥

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न जानामि योगं जपं नैव पूजां
नतोहं सदा सर्वदा शम्भुतुभ्यम्।
जराजन्मदुःखौघ तातप्यमानं
प्रभो पाहि आपन्नमामीश शंभो॥

अर्थ (Stotra Meaning in Hindi):

  • न जानामि योगं – मैं न तो योग जानता हूँ
  • जपं नैव पूजां – न जप और पूजा ही
  • नतोहं सदा सर्वदा शम्भुतुभ्यम् – हे शम्भो। मैं तो सदा-सर्वदा आपको ही नमस्कार करता हूँ।
  • जराजन्मदुःखौघ – बुढापा (जरा), जन्म-मृत्यु के दुःख समूहों से
  • तातप्यमानं – जलते हुए मुझ दुखी की दुःख में रक्षा कीजिये
  • प्रभो पाहि आपन्नमामीश शंभो – हे प्रभु, हे ईश्वर, हे शम्भो, मैं आपको नमस्कार करता हूँ

भावार्थ:

मैं न तो योग जानता हूँ, न जप और पूजा ही। हे शम्भो, मैं तो सदा-सर्वदा आपको ही नमस्कार करता हूँ। हे प्रभु, बुढापा तथा जन्म (मृत्यु) के दुःख समूहों से जलते हुए मुझ दुखी की दुःख में रक्षा कीजिये। हे ईश्वर, हे शम्भो, मैं आपको नमस्कार करता हूँ ॥८॥


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श्री शिव रुद्राष्टकम स्तोत्र

नमामीशमीशान निर्वाणरूपं
विभुं व्यापकं ब्रह्मवेदस्वरूपम्।
निजं निर्गुणं निर्विकल्पं निरीहं
चिदाकाशमाकाशवासं भजेहम्॥


निराकारमोङ्कारमूलं तुरीयं
गिराज्ञानगोतीतमीशं गिरीशम्।
करालं महाकालकालं कृपालं
गुणागारसंसारपारं नतोहम्॥


तुषाराद्रिसंकाशगौरं गभिरं
मनोभूतकोटिप्रभाश्री शरीरम्।
स्फुरन्मौलिकल्लोलिनी चारुगङ्गा
लसद्भालबालेन्दु कण्ठे भुजङ्गा॥


चलत्कुण्डलं भ्रूसुनेत्रं विशालं
प्रसन्नाननं नीलकण्ठं दयालम्।
मृगाधीशचर्माम्बरं मुण्डमालं
प्रियं शङ्करं सर्वनाथं भजामि॥


प्रचण्डं प्रकृष्टं प्रगल्भं परेशं
अखण्डं अजं भानुकोटिप्रकाशं।
त्र्यःशूलनिर्मूलनं शूलपाणिं
भजेहं भवानीपतिं भावगम्यम्॥


कलातीतकल्याण कल्पान्तकारी
सदा सज्जनानन्ददाता पुरारी॥
चिदानन्दसंदोह मोहापहारी
प्रसीद प्रसीद प्रभो मन्मथारी॥


न यावद् उमानाथपादारविन्दं
भजन्तीह लोके परे वा नराणाम्।
न तावत्सुखं शान्ति सन्तापनाशं
प्रसीद प्रभो सर्वभूताधिवासं॥


न जानामि योगं जपं नैव पूजां
नतोहं सदा सर्वदा शम्भुतुभ्यम्।
जराजन्मदुःखौघ तातप्यमानं
प्रभो पाहि आपन्नमामीश शंभो॥

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Bhajan List

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Shiv Bhajans

  • Updated - श्री बद्रीनाथ स्तुति
    पवन मंद सुगंध शीतल,
    हेम मंदिर शोभितम्।
    निकट गंगा बहती निर्मल,
    श्री बद्रीनाथ विश्व्म्भरम्॥
  • श्री शिव पंचाक्षर स्तोत्र - अर्थ सहित
    नागेंद्रहाराय त्रिलोचनाय
    भस्मांग रागाय महेश्वराय।
    पंचाक्षरमिदं पुण्यं यः – जो कोई शिव के इस पंचाक्षर मंत्र का
    पठेत् शिव सन्निधौ – नित्य ध्यान करता है
  • शिव आरती - ओम जय शिव ओंकारा
    जय शिव ओंकारा, ओम जय शिव ओंकारा।
    ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा॥
    ॥ओम जय शिव ओंकारा॥
  • शिवषडाक्षरस्तोत्रम् - ॐ कारं बिंदुसंयुक्तं
    ॐ कारं बिंदुसंयुक्तं
    नित्यं ध्यायंति योगिन:।
    कामदं मोक्षदं चैव
    ॐकाराय नमो नम: ॥
  • श्री शिव चालीसा
    जय गिरिजा पति दीन दयाला।
    सदा करत सन्तन प्रतिपाला॥
    भाल चन्द्रमा सोहत नीके।
    कानन कुण्डल नागफनी के॥
  • शिव मानस पूजा - अर्थ सहित
    रत्नैः कल्पितमासनं हिमजलैः
    स्नानं च दिव्याम्बरं
    स्तोत्राणि सर्वा गिरो – सम्पूर्ण शब्द आपके स्तोत्र हैं
    यत्कर्म करोमि तत्तदखिलं – इस प्रकार मैं जो-जो कार्य करता हूँ,
    शम्भो तवाराधनम् – हे शम्भो, वह सब आपकी आराधना ही है
  • शिव तांडव स्तोत्र
    जटाटवीगलज्जल प्रवाह पावितस्थले
    गलेऽवलम्ब्य लम्बितां भुजङ्ग तुङ्ग मालिकाम्।
    डमड्डमड्डमड्डमन्निनाद वड्डमर्वयं
    चकार चण्डताण्डवं तनोतु नः शिवः शिवम्॥
  • सुबह सुबह ले शिव का नाम
    सुबह सुबह ले शिव का नाम,
    कर ले बन्दे यह शुभ काम
    ओम नमः शिवाय, ओम नमः शिवाय
    ओम नमः शिवाय, ओम नमः शिवाय
  • ज्योतिर्लिंग स्तोत्रम - अर्थ सहित
    सौराष्ट्रे सोमनाथं च
    श्रीशैले मल्लिकार्जुनम्।
    उज्जयिन्यां महाकालं
    ओम्कारममलेश्वरम्॥
  • आओ महिमा गाए भोले नाथ की
    आओ महिमा गाए भोले नाथ की
    भक्ति में खो जाए भोले नाथ की
    भोले नाथ की जय, शम्भू नाथ की जय
    गौरी नाथ की जय, दीना नाथ की जय
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Shiv Bhajan Lyrics

  • बिगड़ी मेरी बना दो मेरे बाबा भोले भाले
    बिगड़ी मेरी बना दो, दुःख दर्द सब मिटा दो,
    दुःख सब के हरने वाले, मेरे बाबा भोले भाले,
    मेरे शम्भू भोले भाले
  • पुरब से जब सुरज निकले
    पुरब से जब सुरज निकले,
    सिंदूरी घन छाये
    पवन के पग में नुपुर बाजे,
    मयुर मन मेरा गाये
  • ऐसी सुबह ना आए
    ऐसी सुबह ना आए, आए ना ऐसी शाम।
    जिस दिन जुबा पे मेरी आए ना शिव का नाम॥
    मन मंदिर में वास है तेरा, तेरी छवि बसाई।
    प्यासी आत्मा बनके जोगन, तेरी शरण में आई।
    ॐ नमः शिवाय, ॐ नमः शिवाय
  • शिवजी के १०८ नाम - अर्थ सहित
    शिव - कल्याण स्वरूप
    शंकर - सबका कल्याण करने वाले
    शम्भू - आनंद स्वरूप वाले
    महादेव - देवों के भी देव
    मृत्युंजय - मृत्यु को जीतने वाले
  • ओम सुन्दरम ओंकार सुन्दरम
    ओम सुन्दरम ओंकार सुन्दरम
    शिव सुन्दरम शिव नाम सुन्दरम
    शिव वन्दनं शिव नाम वन्दनं
    शिव धाम वन्दनं
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Bhajans and Aarti

  • राम नाम के हीरे मोती - कृष्ण नाम के हीरे मोती
    राम नाम के हीरे मोती,
    मैं बिखराऊँ गली गली
    कृष्ण नाम के हीरे मोती,
    मैं बिखराऊँ गली गली
    ले लो रे कोई राम का प्यारा,
    शोर मचाऊँ गली गली
    ले लो रे कोई श्याम का प्यारा,
    शोर मचाऊँ गली गली
  • हनुमान आरती - आरती कीजै हनुमान लला की
    आरती कीजै हनुमान लला की।
    दुष्टदलन रघुनाथ कला की॥
    जाके बल से गिरिवर काँपै।
    रोग-दोष जाके निकट न झाँपै॥
  • जगत के रंग क्या देखूँ, तेरा दीदार काफी है
    जगत के रंग क्या देखूँ,
    तेरा दीदार काफी है।
    करूँ मैं प्यार किस किस से,
    तेरा एक प्यार काफी है॥
    मेरी आँखों में हों हरदम,
    तेरा चमकार काफी है॥
  • गुरु महिमा - 1 - कबीर के दोहे
    - गुरु गोविंद दोऊँ खड़े, काके लागूं पांय।
    - गुरु आज्ञा मानै नहीं, चलै अटपटी चाल।
    - गुरु बिन ज्ञान न उपजै, गुरु बिन मिलै न मोष।
    - सतगुरू की महिमा अनंत, अनंत किया उपकार।
  • अम्बे तू है जगदम्बे काली
    अम्बे तू है जगदम्बे काली,
    जय दुर्गे खप्पर वाली।
    तेरे ही गुण गायें भारती,
    नहीं मांगते धन और दौलत,
    ना चाँदी, ना सोना।
    हम तो मांगे माँ तेरे मन में,
    इक छोटा सा कोना॥
  • सुंदरकाण्ड - सरल हिंदी में (1)
    जामवंत के बचन सुहाए।
    सुनि हनुमंत हृदय अति भाए॥
    तब लगि मोहि परिखेहु तुम्ह भाई।
    सहि दुख कंद मूल फल खाई॥
    जाम्बवान के सुहावने वचन सुनकर हनुमानजी को अपने मन में वे वचन बहुत अच्छे लगे॥
  • मेरा आपकी कृपा से, सब काम हो रहा है
    मेरा आपकी कृपा से, सब काम हो रहा है।
    करते हो तुम कन्हैया, मेरा नाम हो रहा है॥
    हैरान है ज़माना, मंजिल भी मिल रही है।
    करता नहीं मैं कुछ भी, सब काम हो रहा है॥
  • जगजननी जय जय माँ
    जगजननी जय जय माँ, जगजननी जय जय।
    भयहारिणी, भवतारिणी, भवभामिनि जय जय॥
    तू ही सत्-चित्-सुखमय, शुद्ध ब्रह्मरूपा।
    सत्य सनातन, सुन्दर, पर-शिव सुर-भूपा॥
  • माँ दुर्गा के 108 नाम - अर्थसहित
    अनन्ता: जिनके स्वरूप का कहीं अन्त नहीं
    अभव्या : जिससे बढ़कर भव्य कुछ नहीं
    महिषासुर-मर्दिनि: महिषासुर का वध करने वाली
    सर्वासुरविनाशा: सभी राक्षसों का नाश करने वाली
    माहेश्वरी: प्रभु शिव की शक्ति
  • श्री गणेश आरती - गणपति की सेवा मंगल मेवा
    गणपति की सेवा मंगल मेवा,
    सेवा से सब विध्न टरें।
    तीन लोक तैतिस देवता,
    द्वार खड़े सब अर्ज करे॥
    (तीन लोक के सकल देवता,
    द्वार खड़े नित अर्ज करें॥)
  • सूरज की गर्मी से जलते हुए तन को
    सूरज की गर्मी से जलते हुए तन को
    मिल जाये तरुवर की छाया।
    ऐसा ही सुख मेरे मन को मिला है,
    मैं जब से शरण तेरी आया, मेरे राम॥
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Bhakti Geet Lyrics

  • श्री गणेश आरती - सुखकर्ता दुखहर्ता - जय देव, जय मंगलमूर्ती
    सुखकर्ता दुखहर्ता वार्ता विघ्नाची।
    नुरवी पुरवी प्रेम कृपा जयाची॥
    जय देव, जय देव, जय मंगलमूर्ती
    दर्शनमात्रे मन कामनापु्र्ती
    जय देव, जय देव
  • नवदुर्गा - माँ दुर्गा के नौ रुप
    नवरात्रि में दुर्गा पूजा के अवसर पर माँ के नौ रूपों की पूजा-उपासना की जाती है। इन नव दुर्गा को पापों के विनाशिनी कहा जाता है।
    शैलपुत्री (Shailaputri)
    व्रह्मचारणी (Brahmacharini)
    चन्द्रघन्टा (Candraghanta)
    कूष्माण्डा (Kusamanda)
    स्कन्दमाता (Skandamata)
  • अब सौंप दिया इस जीवन का सब भार
    अब सौंप दिया इस जीवन का,
    सब भार तुम्हारे हाथों में
    है जीत तुम्हारे हाथों में,
    और हार तुम्हारे हाथों में
  • नन्द के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की
    आनंद उमंग भयो, जय हो नन्द लाल की।
    नन्द के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की॥
    बृज में आनंद भयो, जय यशोदा लाल की।
    हाथी घोडा पालकी, जय कन्हैया लाल की॥
    जय हो नंदलाल की, जय यशोदा लाल की।
    हाथी घोडा पालकी, जय कन्हैया लाल की॥
  • आरती जगजननी मैं तेरी गाऊं
    आरती जगजननी मैं तेरी गाऊं।
    तुम बिन कौन सुने वरदाती।
    किस को जाकर विनय सुनाऊं॥
    आरती जगजननी मैं तेरी गाऊं
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