Bhajan List – S

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Bhajan List – S


  • सच्ची है तू सच्चा तेरा दरबार
    - सच्ची है तू, सच्चा तेरा दरबार, माता रानिये
    करदे दया की एक नज़र एक बार, माता रानिये
    क्या गम है, कैसी उलझन,
    जब सर पे तेरा हाथ है
    हर दुःख में हर संकट में,
    माता तू हमारे साथ है
  • साई बाबा - धूप आरती
    - साई बाबा – धूप आरती Lyrics in English आरती साईबाबा। सौख्यदातार जीवा। चरणरजातला। घावा दासां विसांवा, भक्तां विसांवा। आरती साईबाबा … Continue reading Sai Baba Aarti – Dhoop Aarti – Evening Aarti
  • Sai Bhajans
    - Sai Bhajans Sai Bhajans एक फकीरा आया शिर्डी गाँव मे कोई कहे संत लगता है, कोई पीर फ़क़ीर बताये। कभी … Continue reading Sai Bhajans – List – Hindi
  • साई की नगरिया जाना है रे बंदे
    - साई की नगरिया जाना है रे बंदे
    जाना है रे बंदे
    जग नाही अपना, जग नाही अपना,
    बेगाना है रे बंदे
    जाना है रे बंदे, जाना है रे बंदे
  • साईनाथ तेरे हजारों हाथ
    - राम नाम की है तू माला
    गौतम वाला तुझ में उजाला
    तेरा दर है दया का सागर
    सब मज़हब भरते है गागर
  • संगति - कबीर के दोहे
    - - Kabir sangat saadhu ki, nit prati kijai jaay.
    - Kabir sangat saadhu ki, jau ki bhoosi khaay.
    - Sangat kijai saadhu ki,kabhi na nishphal hoy.
    - Sangati so sukhya upje, kusangati so dukh hoy.
  • संगति - कबीर के दोहे
    - कबीर संगत साधु की, नित प्रति कीजै जाय।
    कबीर संगत साधु की, जौ की भूसी खाय।
    संगत कीजै साधु की, कभी न निष्फल होय।
    संगति सों सुख्या ऊपजे, कुसंगति सो दुख होय।
  • संकटनाशन गणेश स्तोत्रं - अर्थसहित
    - Pranamya Shirasa Devam
    Gauri Putram Vinayakam
    Bhaktavasam Smaren-nityam
    Ayuh-kamartha Siddhaye ||1||
  • सांसो की सरगम पे
    - सांसो की सरगम पे धड़कन ये दोहराए
    ओम नमः शिवाय, ओम नमः शिवाय
    भगवन सहारा दे मुश्किल घडी है
    रस्ता दिखा, राही तेरी शरण आए
  • संत कबीर के दोहे - 1
    - दु:ख में सुमिरन सब करै, सुख में करै न कोय।
  • संत कबीर के दोहे - 2
    - [kdh] <<< (संत कबीर के दोहे – भाग 1) <<< (Sant Kabir ke Dohe – Page 1) संत कबीर के … Continue reading Sant Kabir ke Dohe – 2 – Hindi
  • संत कबीर के दोहे - 3
    - [kdh] <<< (संत कबीर के दोहे – भाग 2) <<< (Sant Kabir ke Dohe – Page 2) संत कबीर के … Continue reading Sant Kabir ke Dohe – 3 – Hindi
  • कबीर के दोहे - सुमिरन + अर्थसहित
    - - दु:ख में सुमिरन सब करै, सुख में करै न कोय।
    - कबीर सुमिरन सार है, और सकल जंजाल।
    - सांस सांस सुमिरन करो, और जतन कछु नाहिं॥
    - राम नाम सुमिरन करै, सतगुरु पद निज ध्यान।
  • सांवरिया ले चल परली पार (श्री मृदुल कृष्ण शास्त्री | अलका गोयल)
    - सांवरिया ले चल परली पार
    कन्हैया ले चल परली पार
    सांवरिया ले चल परली पार
    जहा विराजे राधा रानी,
    अलबेली सरकार
  • सतगुरु - कबीर के दोहे
    - - Satguru sam koi nahi, saat dip nau khand.
    - Satguru to satbhaav hai, jo as bhed bataaye.
    - Tirath gaye te ek phal, sant mile phal chaar.
    - Satguru mil gaya ju jaaniye, gyaan ujaala hoye.
  • सतगुरु - कबीर के दोहे
    - - सतगुरु सम कोई नहीं, सात दीप नौ खण्ड।
    - सतगुरु तो सतभाव है, जो अस भेद बताय।
    - तीरथ गये ते एक फल, सन्त मिले फल चार।
    - सतगुरु खोजो सन्त, जोव काज को चाहहु।
  • सत्यम शिवम सुन्दरम
    - इश्वर सत्य है, सत्य ही शिव है, शिव ही सुन्दर है
    जागो उठ कर देखो, जीवन ज्योत उजागर है
    सत्यम शिवम सुन्दरम, सत्यम शिवम् सुन्दरम
  • शक्ति दे माँ, शक्ति दे माँ
    - तेरे द्वारे जो भी आया,
    उसने जो माँगा वो पाया
    मैं भी तेरा सवाली,
    शक्तिशाली शेरों वाली, माँ जगदम्बे
  • शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशं - अर्थ सहित
    - शान्ताकारं भुजगशयनं
    पद्मनाभं सुरेशं
    विश्वाधारं गगनसदृशं
    मेघवर्ण शुभाङ्गम्।
  • शिव आरती - शीश गंग अर्धांग पार्वती
    - शीश गंग अर्धंग पार्वती,
    सदा विराजत कैलासी।
    नंदी भृंगी नृत्य करत हैं,
    धरत ध्यान सुर सुखरासी॥
  • शेंदुर लाल चढ़ायो - जय जय श्री गणराज
    - Shendur lal chadhayo achchha gajmukhko
    Dondil laal biraaje sut gauriharako
    Jai jai ji Ganraj vidya sukh data
    Dhanya tumhaara darshan mera man ramataa
  • शेर पे सवार होके आजा शेरावालिये
    - शेर पे सवार होके आजा शेरा वालिये
    सोये हुए भाग्य जगा जा शेरावालिये
    शेरा वालिये, माँ ज्योता वालिये
    ज्योत माँ जगा के तेरी आस ये लगाई है
    जिन का ना कोई उनकी, तुही माँ सहाई है
    रौशनी अंधेरो में दिखा जा शेरावालिये
  • खुशहाल करती, माला माल करती
    - खुशहाल करती, माला माल करती
    शेरावाली, अपने भक्तो को निहाल करती
    अम्बे रानी वरदानी देती, खोल के भंडारे
    झोली ले गया भराके, आया चल के जो द्वारे
    माँ के नाम वाला अमृत, जो पिलो एक बार
    होगा बाल ना बांका, चाहे बैरी हो संसार
  • शिर्डी साईं द्वारकामाई
    - साईं राम, राधे श्याम
    मेघ श्याम, सुन्दर नाम
    शिर्डी साईं, द्वारका माई
    सर्वान्तर्यामी साईं राम
  • शिरडीवाले साईंबाबा, आया है तेरे दर पे सवाली
    - तारीफ़ तेरी निकली है दिल से
    आई है लब पे बनके कव्वाली
    शिरडीवाले साईंबाबा,
    आया है तेरे दर पे सवाली
  • शिव भजन - Shiv Bhajan List
    - Shiv Aarti - Om Jai Shiv Omkara
    Rudrashtakam Stotra, Shiv Manas Puja
    Kailash Ke Nivasi Namo Bar Bar
    Om Sundaram Omkar Sundaram
  • शिव भोला भंडारी, सांई भोला भंडारी
    - भोला भंडारी, सांई भोला भंडारी
    शिव भोला... शिव भोला...
    शिव भोला भंडारी, साधु भोला भंडारी
    सांई भोला भंडारी, शिव भोला भंडारी
  • शिव का नाम लो, हर संकट में ॐ नमो शिवाय
    - शिव का नाम लो Lyrics in English शिव का नाम लो। हर संकट में ॐ नमो शिवाय, बस यह नाम … Continue reading Shiv Ka Naam Lo
  • शिव मानस पूजा - अर्थ सहित
    - रत्नैः कल्पितमासनं हिमजलैः
    स्नानं च दिव्याम्बरं
    स्तोत्राणि सर्वा गिरो – सम्पूर्ण शब्द आपके स्तोत्र हैं
    यत्कर्म करोमि तत्तदखिलं – इस प्रकार मैं जो-जो कार्य करता हूँ,
    शम्भो तवाराधनम् – हे शम्भो, वह सब आपकी आराधना ही है
  • शिव मानस पूजा
    - रत्नैः कल्पितमासनं हिमजलैः
    स्नानं च दिव्याम्बरं
    नानारत्न विभूषितं मृगमदा
    मोदाङ्कितं चन्दनम्।
  • शिव रुद्राष्टकम - अर्थ सहित
    - नमामीशमीशान निर्वाणरूपं
    विभुं व्यापकं ब्रह्मवेदस्वरूपम्।
    निराकार – निराकार स्वरुप
    ओमङ्कारमूलं – ओंकार के मूल
  • शिवषडाक्षरस्तोत्रम् - ॐ कारं बिंदुसंयुक्तं
    - ॐ कारं बिंदुसंयुक्तं
    नित्यं ध्यायंति योगिन:।
    कामदं मोक्षदं चैव
    ॐकाराय नमो नम: ॥
  • शिव शंकर का गुणगान करो
    - शिव शंकर का गुणगान करो,
    शिव भक्ति का रसपान करो।
    जीवन ज्योतिर्मय हो जाए,
    ज्योतिर्लिंगो का ध्यान करो॥
  • शिवशंकर को जिसने पूजा
    - शिव शंकर को जिसने पूजा,
    उसका ही उद्धार हुआ
    अंत:काल को भवसागर में,
    उसका बेडा पार हुआ
  • शिव तांडव स्तोत्र
    - जटाटवीगलज्जल प्रवाह पावितस्थले
    गलेऽवलम्ब्य लम्बितां भुजङ्ग तुङ्ग मालिकाम्।
    डमड्डमड्डमड्डमन्निनाद वड्डमर्वयं
    चकार चण्डताण्डवं तनोतु नः शिवः शिवम्॥
  • शिव तांडव स्तोत्र - अर्थसहित
    - जटाटवीगलज्जल प्रवाह पावितस्थले
    गलेऽवलम्ब्य लम्बितां भुजङ्ग तुङ्ग मालिकाम्।
    जो शिव जी डम-डम डमरू बजा कर प्रचण्ड ताण्डव करते हैं,
    वे शिवजी हमारा कल्यान करें
  • शिवजी के १०८ नाम - अर्थ सहित
    - शिव - कल्याण स्वरूप
    शंकर - सबका कल्याण करने वाले
    शम्भू - आनंद स्वरूप वाले
    महादेव - देवों के भी देव
    मृत्युंजय - मृत्यु को जीतने वाले
  • शिव प्रातः स्मरण स्तोत्र - प्रातः स्मरामि भवभीतिहरं सुरेशं
    - प्रातः स्मरामि भवभीतिहरं सुरेशं
    गङ्गाधरं वृषभवाहनमम्बिकेशम्।
    खट्वाङ्गशूल वरदाभयहस्तमीशं
    संसाररोगहरमौषधमद्वितीयम्॥
  • श्री गणेश चालीसा
    - जय जय जय गणपति गणराजू।
    मंगल भरण करण शुभ काजू॥
    जय गजबदन सदन सुखदाता।
    विश्व-विनायक बुद्घि विधाता॥
  • श्री सिद्धिविनायक देवा
    - श्री सिद्धिविनायक देवा
    जय जय गणनायक देवा
    देवा प्रगटे प्रभादेवी
    रिद्धि सिद्धि संग है सेवी
  • Shri Vishnu Chalisa
    - Namo Vishnu bhagwan kharaari,
    kasht nashaavan akhil bihaari.
    Prabal jagat mein shakti tumhaari,
    tribhuvan phail rahi ujiyaari.
  • श्री विष्णु चालीसा
    - नमो विष्णु भगवान खरारी।
    कष्ट नशावन अखिल बिहारी॥
    प्रबल जगत में शक्ति तुम्हारी।
    त्रिभुवन फैल रही उजियारी॥
  • श्री बद्रीनाथ स्तुति - श्री बद्रीनाथजी की आरती
    - पवन मंद सुगंध शीतल,
    हेम मंदिर शोभितम्।
    निकट गंगा बहती निर्मल,
    श्री बद्रीनाथ विश्व्म्भरम्॥
  • श्री बांके बिहारी तेरी आरती गाऊँ
    - Shree Baanke Bihari teri aarti gaoon,
    Hey giridhar teri aarti gaoon.
    Aarti gaoon pyaare tujhako rijhaoon,
    Shyaam Sundar teri aarti gaoon.
  • Shri Gajanan Maharaj (Shegaon) Aarti
    - Jai jai satchit-swaroopa Swami Ganraya
    Avatarlasi bhuvar jad mudh taraya
    Nirgun brahma sanatan avyaya avinashi
    Sthirchar vyapun urle je ya jagataasi
  • श्री गजानन महाराज (शेगांव) आरती
    - जय जय सतचित स्वरूपा स्वामी गणराया।
    अवतरलासी भूवर जड मुढ ताराया॥
    निर्गुण ब्रह्म सनातन अव्यय अविनाशी।
    स्थिरचर व्यापून उरलें जे या जगताशी॥
  • श्री गणेश प्रार्थना - घालिन लोटांगण - मराठी
    - घालिन लोटांगण, वंदिन चरण।
    डोळ्यांनी पाहिन रूप तुझे।
    प्रेमे आलिंगीन आनंदे पुजिन।
    भावें ओवाळिन म्हणे नामा॥
  • श्री गणपति भज प्रगट पार्वती - श्री गणेश आरती
    - श्री गणपति भज प्रगट पार्वती
    अंक विराजत अविनासी।
    ब्रह्मा विष्णु सिवादि सकल सुर,
    करत आरती उल्लासी॥
  • श्री मृदुल कृष्ण शास्त्री भजन
    - Mujhe charno se laga le
    Radhe Radhe japa karo
    Yeh To Prem Ki Baat Hai Udho
    Apni Vani Mein Amrit Ghol
  • श्री राधे गोविंदा, मन भज ले हरी का प्यारा नाम है - 2 Versions
    - Shri Radhe Govinda, man bhaj le
    Hari ka pyara naam hai
    Gopala Hari ka pyaara naam hai,
    Nandlala Hari ka pyaara naam hai
  • श्री राम चालीसा - श्री रघुवीर भक्त हितकारी
    - श्री रघुवीर भक्त हितकारी।
    सुन लीजै प्रभु अरज हमारी॥
    निशिदिन ध्यान धरै जो कोई।
    ता सम भक्त और नहिं होई॥
  • श्री राम जानकी बैठे हैं मेरे सीने में
    - Shri Ram Janki baithe hai mere seene mein,
    dekh lo mere dil ke nagine mein.
    Mujh ko keerti na vaibhav, na yash chaahiye,
    Ram ke naam ka mujh ko ras chaahiye.
  • श्री राम स्तुति - श्रीरामचन्द्र कृपालु भजु मन
    - Shri Ramchandra kripalu bhajman,
    haran bhav bhaya darunam
    Nav-kanj-lochan kanj-mukh,
    kar-kanj pad-kanjarunam
  • श्री राम आरती - श्रीरामचन्द्र कृपालु भज मन - अर्थ सहित
    - श्रीरामचन्द्र कृपालु भज मन
    हरण भवभय दारुणम्।
    नवकंज-लोचन कंज-मुख
    कर-कंज पद-कंजारुणम्॥
    श्रीरामचन्द्र कृपालु भज मन - हे मन, कृपालु (कृपा करनेवाले, दया करनेवाले) भगवान श्रीरामचंद्रजी का भजन कर
  • श्री शनि चालीसा - जयति जयति शनिदेव दयाला
    - जयति जयति शनिदेव दयाला।
    करत सदा भक्तन प्रतिपाला॥
    चारि भुजा, तनु श्याम विराजै।
    माथे रतन मुकुट छवि छाजै॥
  • Shri Shani Chalisa - Jayati Jayati Shanidev Dayaala
    - Jayati jayati Shanidev dayaala.
    Karat sada bhaktan pratipaala.
    Chaari bhuja, tanu shyaam viraajai.
    Maathe ratan mukut chhavi chhaajai.
  • श्याम मने चाकर राखो जी - मीरा भजन - अर्थसहित
    - श्याम मने चाकर राखो जी,
    चाकर रहसूं बाग लगासूं,
    नित उठ दरसण पासूं।
    वृन्दावन की कुंजगलिन में
    तेरी लीला गासूं॥
  • श्याम सपनो में आता क्यों नहीं
    - श्याम सपनो में आता क्यों नहीं
    प्यारी सूरत दिखाता क्यों नहीं
    मेरा दिल तो दीवाना हो गया
    मुझे सूरत दिखाता क्यों नहीं
  • श्याम तेरे ही भरोसे, मेरा परिवार है
    - श्याम तेरे ही भरोसे,
    मेरा परिवार है।
    तू ही मेरी नाव का मांझी,
    तू ही पतवार है॥
  • श्याम तेरे मिलने का सत्संग बहाना है
    - श्याम तेरे मिलने का
    सत्संग बहाना है
    जब से तेरी लगन लगी
    दिल हुआ दीवाना है
  • श्याम तेरी बन्सी पुकारे राधा नाम
    - श्याम तेरी बन्सी पुकारे राधा नाम
    लोग करे मीरा को यूँ ही बदनाम
    साँवरे की बन्सी को बजने से काम
    राधा का भी श्याम, वो तो मीरा का भी श्याम
  • श्यामा तेरे चरणों की, गर धूल जो मिल जाए
    - Shyama tere charno ki, Radhe tere charano ki,
    gar dhool jo mil jaye.
    Sach kahata hoon meri takadir badal jaye.
    Sunata hoon teri rahamat, din raat barasati hai.
    Ek boond jo mil jaye, dil ki kali khil jaye.
  • सिद्धि विनायक मङ्गल दाता
    - सिद्धि विनायक मङ्गल दाता,
    मङ्गल कर दो काज
    आये हैं हम शरण तुम्हारी,
    शरण तुम्हारी आज
  • सिद्धिविनायक जय गणपति, गाएं सदा तेरी आरती
    - सिद्धिविनायक जय गणपति,
    गाएं सदा तेरी आरती
    त्रिकाल ज्ञाता, मंगल के दाता,
    संकट विघन दूर करना सभी
  • सीताराम सीताराम सीताराम कहिये
    - सीताराम सीताराम सीताराम कहिये,
    जाहि विधि राखे राम, ताहि विधि रहिये।
    मुख में हो राम नाम, राम सेवा हाथ में,
    तू अकेला नहिं प्यारे, राम तेरे साथ में।
  • Sri Vishnu Sahasranamam - 2 - Hindi
    - Vishnu Sahasranamam Lyrics – 2 Sri Vishnu Sahasranamam in Hindi <<< From Vishnu Sahasranama Lyrics -1 धर्मगुब धर्मकृद धर्मी सदसत्क्षरं-अक्षरं। … Continue reading Sri Vishnu Sahasranamam – 2 – Hindi
  • श्री विष्णु सहस्त्रनाम
    - Vishnu Sahasranamam Lyrics ॐ विश्वं विष्णु: वषट्कारो भूत-भव्य-भवत-प्रभुः। भूत-कृत भूत-भृत भावो भूतात्मा भूतभावनः॥ Sri Vishnu Sahasranamam in Hindi ॐ नमो … Continue reading Sri Vishnu Sahasranamam – Hindi
  • Stotra - स्तोत्र
    - Stotra – स्तोत्र Stotra शिव रुद्राष्टकम – अर्थ सहित नमामीशमीशान निर्वाणरूपं विभुं व्यापकं ब्रह्मवेदस्वरूपम्। निराकार – निराकार स्वरुप ओमङ्कारमूलं – … Continue reading Stotra – List – Hindi
  • सुबह सुबह ले शिव का नाम
    - सुबह सुबह ले शिव का नाम,
    कर ले बन्दे यह शुभ काम
    ओम नमः शिवाय, ओम नमः शिवाय
    ओम नमः शिवाय, ओम नमः शिवाय
  • श्री सुधांशु जी महाराज भजन
    - Jahan Le Chaloge Wahi Mai Chalunga
    Karta Rahu Gungan, Mujhe Do Aisa Vardan
    Hum Sab Milke Aaye Data Tere Darbar
    Mere Data Ke Darbar Me
  • सुख के सब साथी, दुःख में ना कोई
    - सुख के सब साथी, दुःख में न कोई।
    मेरे राम, मेरे राम,
    तेरा नाम एक सांचा दूजा ना कोई॥
    सुख के सब साथी, दुःख में ना कोई।
  • श्री गणेश आरती - सुखकर्ता दुखहर्ता - जय देव, जय मंगलमूर्ती
    - Sukhkarta Dukhharta Varta Vighnachi.
    Nurvi Purvi Prem Kripa Jayachi.
    Jai Dev, Jai Dev, Jai Mangal Murti.
    Darshan-maatre Man Kaamanaa-purti.
    Jai Dev, Jai Dev
  • सुंदरकाण्ड - चौपाई और दोहे - Audio (1 to 60) - List
    - हनुमानजी का सीता शोध के लिए लंका प्रस्थान
    हनुमानजी और विभीषण का संवाद - श्रीराम की महिमा
    हनुमान ने सीताजीको रामचन्द्रजीका सन्देश दिया
    लंका दहन - हनुमानजी ने लंका जलाई
    प्रभु श्री रामचंद्रजी की महिमा
  • सुंदरकाण्ड - 2
    - मसक समान रूप कपि धरी।
    लंकहि चलेउ सुमिरि नरहरी॥
    नाम लंकिनी एक निसिचरी।
    सो कह चलेसि मोहि निंदरी॥
    हनुमानजी मच्छर के समान, छोटा-सा रूप धारण कर, प्रभु श्री रामचन्द्रजी के नाम का सुमिरन करते हुए लंका में प्रवेश करते है॥
  • सुंदरकाण्ड - 3
    - सुनहु पवनसुत रहनि हमारी।
    जिमि दसनन्हि महुँ जीभ बिचारी॥
    तात कबहुँ मोहि जानि अनाथा।
    करिहहिं कृपा भानुकुल नाथा॥
    विभीषण कहते है की हे हनुमानजी! हमारी रहनी हम कहते है सो सुनो। जैसे दांतों के बिचमें बिचारी जीभ रहती है, ऐसे हम इन राक्षसोंके बिच में रहते है॥
  • सुंदरकाण्ड - सरल हिंदी में (1)
    - जामवंत के बचन सुहाए।
    सुनि हनुमंत हृदय अति भाए॥
    तब लगि मोहि परिखेहु तुम्ह भाई।
    सहि दुख कंद मूल फल खाई॥
    जाम्बवान के सुहावने वचन सुनकर हनुमानजी को अपने मन में वे वचन बहुत अच्छे लगे॥
  • सुंदरकाण्ड - 4
    - सीता तैं मम कृत अपमाना।
    कटिहउँ तव सिर कठिन कृपाना॥
    नाहिं त सपदि मानु मम बानी।
    सुमुखि होति न त जीवन हानी॥
    हे सीता! तूने मेरा मान भंग कर दिया है। इस वास्ते इस कठोर खडग (कृपान) से मैं तेरा सिर उड़ा दूंगा॥
  • सुंदरकाण्ड - 5
    - तब देखी मुद्रिका मनोहर।
    राम नाम अंकित अति सुंदर॥
    चकित चितव मुदरी पहिचानी।
    हरष बिषाद हृदयँ अकुलानी॥
    फिर सीताजीने उस मुद्रिकाको देखा तो वह सुन्दर मुद्रिका रामचन्द्रजीके मनोहर नामसे अंकित हो रही थी अर्थात उसपर श्री राम का नाम खुदा हुआ था॥
  • सुंदरकाण्ड - 6
    - जौं रघुबीर होति सुधि पाई।
    करते नहिं बिलंबु रघुराई॥
    राम बान रबि उएँ जानकी।
    तम बरुथ कहँ जातुधान की॥
    हे माता! जो रामचन्द्रजीको आपकी खबर मिल जाती तो प्रभु कदापि विलम्ब नहीं करते॥
  • सुंदरकाण्ड - 7
    - ब्रह्मबान कपि कहुँ तेहिं मारा।
    परतिहुँ बार कटकु संघारा॥
    तेहिं देखा कपि मुरुछित भयऊ।
    नागपास बाँधेसि लै गयऊ॥
    मेघनादने हनुमानजीपर ब्रम्हास्त्र चलाया, उस ब्रम्हास्त्रसे हनुमानजी गिरने लगे तो गिरते समय भी उन्होंने अपने शरीरसे बहुतसे राक्षसोंका संहार कर डाला॥
  • सुंदरकाण्ड - 8
    - जानउँ मैं तुम्हारि प्रभुताई।
    सहसबाहु सन परी लराई॥
    समर बालि सन करि जसु पावा।
    सुनि कपि बचन बिहसि बिहरावा॥
    हे रावण! आपकी प्रभुता तो मैंने तभीसे जान ली है कि जब आपको सहस्रबाहुके साथ युद्ध करनेका काम पड़ा था॥
  • सुंदरकाण्ड - 9
    - पूँछहीन बानर तहँ जाइहि।
    तब सठ निज नाथहि लइ आइहि॥
    जिन्ह कै कीन्हिसि बहुत बड़ाई।
    देखउ मैं तिन्ह कै प्रभुताई॥
    जब यह वानर पूंछहीन होकर अपने मालिकके पास जायेगा, तब अपने स्वामीको यह ले आएगा॥
  • सुंदरकाण्ड - 10
    - चलत महाधुनि गर्जेसि भारी।
    गर्भ स्रवहिं सुनि निसिचर नारी॥
    नाघि सिंधु एहि पारहि आवा।
    सबद किलिकिला कपिन्ह सुनावा॥
    जाते समय हनुमानजीने ऐसी भारी गर्जना की, कि जिसको सुनकर राक्षसियोंके गर्भ गिर गये॥
  • सुंदरकाण्ड - 11
    - चलत मोहि चूड़ामनि दीन्ही।
    रघुपति हृदयँ लाइ सोइ लीन्ही॥
    नाथ जुगल लोचन भरि बारी।
    बचन कहे कछु जनककुमारी॥
    और चलते समय मुझको यह चूड़ामणि दिया हे. ऐसे कह कर हनुमानजीने वह चूड़ामणि रामचन्द्रजीको दे दिया। तब रामचन्द्रजीने उस रत्नको लेकर अपनी छातीसे लगाया॥
  • सुंदरकाण्ड - 12
    - नाथ भगति अति सुखदायनी।
    देहु कृपा करि अनपायनी॥
    सुनि प्रभु परम सरल कपि बानी।
    एवमस्तु तब कहेउ भवानी॥
    रामचन्द्रजीके ये वचन सुनकर हनुमानजीने कहा कि हे नाथ! मुझे तो कृपा करके आपकी अनपायिनी (जिसमें कभी विच्छेद नहीं पडे ऐसी, निश्चल) कल्याणकारी और सुखदायी भक्ति दो॥
  • सुंदरकाण्ड - 13
    - श्रवन सुनी सठ ता करि बानी।
    बिहसा जगत बिदित अभिमानी॥
    सभय सुभाउ नारि कर साचा।
    मंगल महुँ भय मन अति काचा॥
    कवि कहता है कि वो शठ मन्दोदरीकी यह वाणी सुनकर हँसा, क्योंकि उसके अभिमानकौ तमाम संसार जानता है॥
  • सुंदरकाण्ड - 14
    - माल्यवंत अति सचिव सयाना।
    तासु बचन सुनि अति सुख माना॥
    तात अनुज तव नीति बिभूषन।
    सो उर धरहु जो कहत बिभीषन॥
    वहां माल्यावान नाम एक सुबुद्धि मंत्री बैठा हुआ था. वह विभीषणके वचन सुनकर. अतिप्रसन्न हुआ ॥
  • सुंदरकाण्ड - 15
    - ऐहि बिधि करत सप्रेम बिचारा।
    आयउ सपदि सिंदु एहिं पारा॥
    कपिन्ह बिभीषनु आवत देखा।
    जाना कोउ रिपु दूत बिसेषा॥
    यिभीषण इस प्रकार प्रेमसहित अनेक प्रकारके विचार करते हुए तुरंत समुद्रके इस पार आए॥
  • सुंदरकाण्ड - 16
    - अस कहि करत दंडवत देखा।
    तुरत उठे प्रभु हरष बिसेषा॥
    दीन बचन सुनि प्रभु मन भावा।
    भुज बिसाल गहि हृदयँ लगावा॥
    ऐसे कहते हुए बिभीषणको दंडवत करते देखकर प्रभु बड़े अल्हादके साथ तुरंत उठ खड़े हए॥
  • सुंदरकाण्ड - 17
    - सुनु लंकेस सकल गुन तोरें।
    तातें तुम्ह अतिसय प्रिय मोरें॥
    राम बचन सुनि बानर जूथा।
    सकल कहहिं जय कृपा बरूथा॥
    हे लंकेश (लंकापति)! सुनो, आपमें सब गुण है और इसीसे आप मुझको अतिशय प्यारें लगते हो॥
  • सुंदरकाण्ड - 18
    - प्रगट बखानहिं राम सुभाऊ।
    अति सप्रेम गा बिसरि दुराऊ॥
    रिपु के दूत कपिन्ह तब जाने।
    सकल बाँधि कपीस पहिं आने॥
    और देखते देखते प्रेम ऐसा बढ़ गया कि वह (रावणदूत शुक) छिपाना भूल कर रामचन्द्रजीके स्वभावकी प्रकटमें प्रशंसा करने लगा॥
  • सुंदरकाण्ड - 19
    - ए कपि सब सुग्रीव समाना।
    इन्ह सम कोटिन्ह गनइ को नाना॥
    राम कृपाँ अतुलित बल तिन्हहीं।
    तृन समान त्रैलोकहि गनहीं॥
    ये सब वानर सुग्रीवके समान बलवान हैं। इनके बराबर दूसरे करोड़ों वानर हैं, कौन गिन सकता है? ॥
  • सुंदरकाण्ड - 20
    - लछिमन बान सरासन आनू।
    सोषौं बारिधि बिसिख कृसानु॥
    सठ सन बिनय कुटिल सन प्रीति।
    सहज कृपन सन सुंदर नीति॥
    हे लक्ष्मण! धनुष बाण लाओ। क्योंकि अब इस समुद्रको बाणकी आगसे सुखाना होगा॥
  • सुंदरकाण्ड - चौपाई और दोहे - Audio - 1
    - जामवंत के बचन सुहाए।
    सुनि हनुमंत हृदय अति भाए॥
    तब लगि मोहि परिखेहु तुम्ह भाई।
    सहि दुख कंद मूल फल खाई॥
  • सुंदरकाण्ड - चौपाई और दोहे - Audio - 2
    - सुनहु पवनसुत रहनि हमारी।
    जिमि दसनन्हि महुँ जीभ बिचारी॥
    तात कबहुँ मोहि जानि अनाथा।
    करिहहिं कृपा भानुकुल नाथा॥
  • सुंदरकाण्ड - चौपाई और दोहे - Audio - 3
    - तब देखी मुद्रिका मनोहर।
    राम नाम अंकित अति सुंदर॥
    चकित चितव मुदरी पहिचानी।
    हरष बिषाद हृदयँ अकुलानी॥
  • सुंदरकाण्ड - चौपाई और दोहे - Audio - 4
    - सुनि सुत बध लंकेस रिसाना।
    पठएसि मेघनाद बलवाना॥
    मारसि जनि सुत बाँधेसु ताही।
    देखिअ कपिहि कहाँ कर आही॥
  • सुंदरकाण्ड - Sunderkand in Hindi - Index
    - हनुमानजी का सीता शोध के लिए लंका प्रस्थान
    सिताजीने हनुमानको आशीर्वाद दिया
    हनुमानजी ने श्रीराम को सीताजी का सन्देश दिया
    भगवान् श्री राम की महिमा
    समुद्र की श्री राम से विनती
  • सूरज की गर्मी से जलते हुए तन को
    - सूरज की गर्मी से जलते हुए तन को
    मिल जाये तरुवर की छाया।
    ऐसा ही सुख मेरे मन को मिला है,
    मैं जब से शरण तेरी आया, मेरे राम॥
  • स्वर्ग नर्क है इस धरती पर
    - Video - अनूप जलोटा (Anup Jalota)
  • स्वर्ग नर्क है इस धरती पर
    नही गगन के देखो पार
    अच्छा करम तो सुख देवे है
    बुरा करम है दुःख का सार
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