Kabir ke Bhajans – List – Hindi

Kabir Dohe with Meaning in Hindi

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Kabir Bhajans – Hindi – List


  • मन लाग्यो मेरो यार, फ़कीरी में
    मन लाग्यो मेरो यार, फ़कीरी में
    जो सुख पाऊँ नाम भजन में
    सो सुख नाहिं अमीरी में
    आखिर यह तन ख़ाक मिलेगा
    कहाँ फिरत मग़रूरी में
  • साई की नगरिया जाना है रे बंदे
    साई की नगरिया जाना है रे बंदे
    जाना है रे बंदे
    जग नाही अपना, जग नाही अपना,
    बेगाना है रे बंदे
    जाना है रे बंदे, जाना है रे बंदे
  • रे दिल गाफिल, गफलत मत कर
    रे दिल गाफिल, गफलत मत कर
    एक दिना जम आवेगा॥ टेक॥
    सौदा करने या जग आया।
    पूजी लाया मूल गॅंवाया॥
    सिर पाहन का बोझा लीता।
    आगे कौन छुडावेगा॥
  • गुरु महिमा - 1 - कबीर के दोहे
    - गुरु गोविंद दोऊँ खड़े, काके लागूं पांय।
    - गुरु आज्ञा मानै नहीं, चलै अटपटी चाल।
    - गुरु बिन ज्ञान न उपजै, गुरु बिन मिलै न मोष।
    - सतगुरू की महिमा अनंत, अनंत किया उपकार।
  • बीत गये दिन भजन बिना रे - कबीर भजन
    बीत गये दिन भजन बिना रे।
    भजन बिना रे, भजन बिना रे॥
    बाल अवस्था खेल गवांयो।
    जब यौवन तब मान घना रे॥
  • मन का फेर - कबीर के दोहे
    - माला फेरत जुग गया, मिटा न मन का फेर।
    - माया मरी न मन मरा, मर मर गये शरीर।
    - न्हाये धोये क्या हुआ, जो मन का मैल न जाय।
    - मीन सदा जल में रहै, धोये बास न जाय॥
  • सुमिरन - कबीर के दोहे
    - दु:ख में सुमिरन सब करै, सुख में करै न कोय।
    - कबीर सुमिरन सार है, और सकल जंजाल।
    - सांस सांस सुमिरन करो, और जतन कछु नाहिं॥
    - राम नाम सुमिरन करै, सतगुरु पद निज ध्यान।
  • माटी कहे कुम्हार से
    दुर्बल को ना सतायिये,
    जाकी मोटी हाय।
    बिना जीब के हाय से,
    लोहा भस्म हो जाए॥
  • झीनी झीनी बीनी चदरिया
    झीनी झीनी बीनी चदरिया
    काहे का ताना काहे की भरनी।
    कौन तार से बीनी चदरिया॥
    इदा पिङ्गला ताना भरनी।
    सुषुम्ना तार से बीनी चदरिया॥
  • तूने रात गँवायी सोय के - कबीर भजन
    तूने रात गँवायी सोय के,
    दिवस गँवाया खाय के।
    हीरा जनम अमोल था,
    कौड़ी बदले जाय॥
  • नैया पड़ी मंझधार
    नैया पड़ी मंझधार,
    गुरु बिन कैसे लागे पार।
    अन्तर्यामी एक तुम्ही हो,
    जीवन के आधार।
    जो तुम छोड़ो हाथ प्रभु जी, कौन उतारे पार॥
  • राम बिनु तन को ताप न जाई
    राम बिनु तन को ताप न जाई
    जल में अगन रही अधिकाई।
    राम बिनु तन को ताप न जाई॥
    राम बिनु तन को ताप न जाई॥
  • भक्ति - कबीर के दोहे
    - कामी क्रोधी लालची, इनसे भक्ति ना होय।
    - भक्ति बिन नहिं निस्तरे, लाख करे जो कोय।
    - भक्ति भक्ति सब कोई कहै, भक्ति न जाने भेद।
    - भक्ति जु सीढ़ी मुक्ति की, चढ़े भक्त हरषाय।
  • संगति - कबीर के दोहे
    कबीर संगत साधु की, नित प्रति कीजै जाय।
    कबीर संगत साधु की, जौ की भूसी खाय।
    संगत कीजै साधु की, कभी न निष्फल होय।
    संगति सों सुख्या ऊपजे, कुसंगति सो दुख होय।
  • सतगुरु - कबीर के दोहे
    - सतगुरु सम कोई नहीं, सात दीप नौ खण्ड।
    - सतगुरु तो सतभाव है, जो अस भेद बताय।
    - तीरथ गये ते एक फल, सन्त मिले फल चार।
    - सतगुरु खोजो सन्त, जोव काज को चाहहु।
  • गुरु महिमा - 2 - कबीर के दोहे
    - आछे दिन पाछे गए, गुरु सों किया न हेत।
    - कबीर ते नर अन्ध हैं, गुरु को कहते और।
    - गुरु को सिर राखिये, चलिये आज्ञा माहिं।
    - भक्ति पदारथ तब मिलै, जब गुरु होय सहाय।
  • केहि समुझावौ
    केहि समुझावौ सब जग अन्धा॥
    इक दु होयॅं उन्हैं समुझावौं
    सबहि भुलाने पेटके धन्धा।
    पानी घोड पवन असवरवा
    ढरकि परै जस ओसक बुन्दा॥
  • दिवाने मन
    दिवाने मन भजन बिना दुख पैहौ॥
    पहिला जनम भूत का पै हौ
    सात जनम पछिताहौ।
    कॉंटा पर का पानी पैहौ
    प्यासन ही मरि जैहौ॥
  • बहुरि नहिं आवना या देस
    बहुरि नहिं आवना या देस॥
    जो जो ग बहुरि नहि
    आ पठवत नाहिं सेंस।
    सुर नर मुनि अरु पीर औलिया
    देवी देव गनेस॥
  • संत कबीर के दोहे - 1
    दु:ख में सुमिरन सब करै, सुख में करै न कोय।

  • सन्त कबीर - Sant Kabir
    कवीर के गुरु अपने समय के प्रसिद्ध राम-भक्त रामानन्द जी थे। सूफी फकीर शेख तकी से भी उन्होंने दीक्षा ली थी।
  • कबीर के भजन
    मन लाग्यो मेरो यार, फ़कीरी में
    साई की नगरिया जाना है रे बंदे
    रे दिल गाफिल, गफलत मत कर
    दु:ख में सुमिरन सब करै, सुख में करै न कोय।
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Sant Kabirdas ke Bhajan