Sumiran – Kabir Dohe – Hindi

– दु:ख में सुमिरन सब करै, सुख में करै न कोय।
– कबीर सुमिरन सार है, और सकल जंजाल।
– सांस सांस सुमिरन करो, और जतन कछु नाहिं॥
– राम नाम सुमिरन करै, सतगुरु पद निज ध्यान।

Kabir ke Dohe

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Sumiran – Kabir Dohe


दु:ख में सुमिरन सब करै,
सुख में करै न कोय।
जो सुख में सुमिरन करै,
तो दु:ख काहे को होय॥

अर्थ (Meaning in Hindi):

  • दु:ख में सुमिरन सब करै – आमतौर पर मनुष्य ईश्वर को दुःख में याद करता है।
  • सुख में करै न कोय – सुख में ईश्वर को भूल जाते है
  • जो सुख में सुमिरन करै – यदि सुख में भी इश्वर को याद करे
  • तो दु:ख काहे को होय – तो दुःख निकट आएगा ही नहीं

काह भरोसा देह का,
बिनसी जाय छिन मांहि।
सांस सांस सुमिरन करो
और जतन कछु नाहिं॥

अर्थ (Meaning in Hindi):

  • कहा भरोसा देह का – इस शरीर का क्या भरोसा है
  • बिनसी जाय छिन मांहि – किसी भी क्षण यह (शरीर) हमसे छीन सकता है (1), इसलिए
  • सांस सांस सुमिरन करो – हर साँस में ईश्वर को याद करो
  • और जतन कछु नाहिं – इसके अलावा मुक्ति का कोई दूसरा मार्ग नहीं है

कबीर सुमिरन सार है,
और सकल जंजाल।
आदि अंत मधि सोधिया,
दूजा देखा काल॥

अर्थ (Meaning in Hindi):

  • कबीर सुमिरन सार है – कबीरदासजी कहते हैं कि सुमिरन (ईश्वर का ध्यान) ही मुख्य है,
  • और सकल जंजाल – बाकी सब मोह माया का जंजाल है
  • आदि अंत मधि सोधिया – शुरू में, अंत में और मध्य में जांच परखकर देखा है,
  • दूजा देखा काल – सुमिरन के अलावा बाकी सब काल (दुःख) है
    (सार – essence – सारांश, तत्त्व, मूलतत्त्व)

राम नाम सुमिरन करै,
सतगुरु पद निज ध्यान।
आतम पूजा जीव दया,
लहै सो मुक्ति अमान॥

अर्थ (Meaning in Hindi):

  • राम नाम सुमिरन करै – जो मनुष्य राम नाम का सुमिरन करता है (इश्वर को याद करता है)
  • सतगुरु पद निज ध्यान – सतगुरु के चरणों का निरंतर ध्यान करता है
  • आतम पूजा – अंतर्मन से ईश्वर को पूजता है
  • जीव दया – सभी जीवो पर दया करता है
  • लहै सो मुक्ति अमान – वह इस संसार से मुक्ति (मोक्ष) पाता है।

सुमिरण मारग सहज का,
सतगुरु दिया बताय।
सांस सांस सुमिरण करूं,
इक दिन मिलसी आय॥

अर्थ (Meaning in Hindi):

  • सुमिरण मारग सहज का – सुमिरण का मार्ग बहुत ही सहज और सरल है
  • सतगुरु दिया बताय – जो मुझे सतगुरु ने बता दिया है
  • सांस सांस सुमिरण करूं – अब मै हर साँस में प्रभु को याद करता हूँ
  • इक दिन मिलसी आय – एक दिन निश्चित ही मुझे ईश्वर के दर्शन होंगे

सुमिरण की सुधि यौ करो,
जैसे कामी काम।
एक पल बिसरै नहीं,
निश दिन आठौ जाम॥

अर्थ (Meaning in Hindi):

  • सुमिरण की सुधि यौ करो – ईश्वर को याद इस प्रकार करो
  • जैसे कामी काम – जैसे कामी पुरुष हर समय विषयो के बारे में सोचता है
  • एक पल बिसरै नहीं – एक पल भी व्यर्थ मत गवाओ
  • निश दिन आठौ जाम – रात, दिन, आठों पहर प्रभु परमेश्वर को याद करो

बिना साँच सुमिरन नहीं,
बिन भेदी भक्ति न सोय।
पारस में परदा रहा,
कस लोहा कंचन होय॥

अर्थ (Meaning in Hindi):

  • बिना सांच सुमिरन नहीं – बिना ज्ञान के प्रभु का स्मरण (सुमिरन) नहीं हो सकता और
  • बिन भेदी भक्ति न सोय – भक्ति का भेद जाने बिना सच्ची भक्ति नहीं हो सकती
  • पारस में परदा रहा – जैसे पारस में थोडा सा भी खोट हो
  • कस लोहा कंचन होय – तो वह लोहे को सोना नहीं बना सकता.
    • यदि मन में विकारों का खोट हो तो मनुष्य सच्चे मन से सुमिरन नहीं कर सकता

दर्शन को तो साधु हैं,
सुमिरन को गुरु नाम।
तरने को आधीनता,
डूबन को अभिमान॥

अर्थ (Meaning in Hindi):

  • दर्शन को तो साधु हैं – दर्शन के लिए सन्तों का दर्शन श्रेष्ठ हैं और
  • सुमिरन को गुरु नाम – सुमिरन के लिए (चिन्तन के लिए) गुरु व्दारा बताये गये नाम एवं गुरु के वचन उत्तम है
  • तरने को आधीनता – भवसागर (संसार रूपी भव) से पार उतरने के लिए आधीनता अर्थात विनम्र होना अति आवश्यक है
  • डूबन को अभिमान – लेकिन डूबने के लिए तो अभिमान, अहंकार ही पर्याप्त है (अर्थात अहंकार नहीं करना चाहिए)

लूट सके तो लूट ले,
राम नाम की लूट।
पाछे फिर पछ्ताओगे,
प्राण जाहिं जब छूट॥

अर्थ (Meaning in Hindi):

  • लूट सके तो लूट ले – अगर लूट सको तो लूट लो
  • राम नाम की लूट – अभी राम नाम की लूट है,
    • अभी समय है, तुम भगवान का जितना नाम लेना चाहते हो ले लो
  • पाछे फिर पछ्ताओगे – यदि नहीं लुटे तो बाद में पछताना पड़ेगा
  • प्राण जाहिं जब छूट – जब प्राण छुट जायेंगे

आदि नाम पारस अहै,
मन है मैला लोह।
परसत ही कंचन भया,
छूटा बंधन मोह॥

अर्थ (Meaning in Hindi):

  • आदि नाम पारस अहै – ईश्वर का स्मरण पारस के समान है
  • मन है मैला लोह – विकारों से भरा मन (मैला मन) लोहे के समान है
  • परसत ही कंचन भया – पारस के संपर्क से लोहा कंचन (सोना) बन जाता है
    • ईश्वर के नाम से मन शुद्ध हो जाता है
  • छूटा बंधन मोह – और मनुष्य मोह माया के बन्धनों से छूट जाता है

कबीरा सोया क्या करे,
उठि न भजे भगवान।
जम जब घर ले जायेंगे,
पड़ी रहेगी म्यान॥


पाँच पहर धन्धे गया,
तीन पहर गया सोय।
एक पहर हरि नाम बिन,
मुक्ति कैसे होय॥


नींद निशानी मौत की,
उठ कबीरा जाग।
और रसायन छांड़ि के,
नाम रसायन लाग॥


रात गंवाई सोय के,
दिवस गंवाया खाय।
हीरा जन्म अमोल था,
कोड़ी बदले जाय॥

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Notes

1.

यह शरीर नश्वर है और इसका कोई भरोसा नहीं है। पंचतत्वों से बना यह शरीर किस भी क्षण फिर पंचतत्वों में विलीन हो जाएगा।
– दोहा – Back to Doha

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Sumiran – Kabir Dohe

– कबीर सुमिरन सार है, और सकल जंजाल।
– दु:ख में सुमिरन सब करै, सुख में करै न कोय।
– राम नाम सुमिरन करै, सतगुरु पद निज ध्यान।
– सांस सांस सुमिरन करो, और जतन कछु नाहिं॥
– कबीरा सोया क्या करे, उठि न भजे भगवान।

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