Kabir Ke Dohe – List – Hindi

संत कबीर के दोहे – Kabirdas Ke Dohe

_

Kabir Ke Dohe in Hindi – Topics

गुरु महिमा (Guru Mahima)
गुरु गोविंद दोऊँ खड़े
गुरु आज्ञा मानै नहीं
गुरु बिन ज्ञान न उपजै
गुरु कुम्हार शिष कुंभ है

सतगुरू की महिमा अनंत
गुरु समान दाता नहीं
गुरु पारस को अन्तरो
कबीर गुरु की भक्ति बिन


सुमिरन (Sumiran – Kabir Dohe)
दु:ख में सुमिरन सब करै
बिनसी जाय छिन मांहि
कबीर सुमिरन सार है
राम नाम सुमिरन करै

सुमिरण मारग सहज का
सुमिरण की सुधि यौ करो
बिना साँच सुमिरन नहीं
आदि नाम पारस अहै,


मन का फेर
माला फेरत जुग गया
माया मरी न मन मरा
न्हाये धोये क्या हुआ
जग में बैरी कोय नहीं
तन को जोगी सब करै

बुरा जो देखन मैं चला
कबीर मन पंछी भय
मन दिना कछु और ही
सुमिरन मन में लाइए


भक्ति (Bhakti)
भक्ति जु सीढ़ी मुक्ति की
भक्ति भक्ति सब कोई कहै
भक्ति बिन नहिं निस्तरे
भक्ति महल बहु ऊँच है

जब लग नाता जगत का
भाव बिना नहिं भक्ति जग
भक्ति भाव भादौं नदी
कामी क्रोधी लालची, इनसे भक्ति ना होय


संत कबीर के दोहे – 1
दु:ख में सुमिरन सब करै
गुरु गोविंद दोऊँ खड़े
लूट सके तो लूट ले
सतगुरू की महिमा अनंत

कहैं कबीर देय तू
माया मरी न मन मरा
माला फेरत जुग गया
बार-बार नहिं करि सके
कहैं कबीर सो भक्त जन


संगति – Kabirdasji ke Dohe
कबीर संगत साधु की
संगत कीजै साधु की
संगति सों सुख्या ऊपजे
कबीरा मन पँछी भया

सज्जन सों सज्जन मिले
साधु संग गुरु भक्ति अरू
साधुन के सतसंग से
हरि संगत शीतल भया


सतगुरु (Satguru – Kabir Dohe)
सतगुरु सम कोई नहीं
सतगुरु तो सतभाव है
सतगुरु शब्द उलंघ के
सतगुरु खोजो सन्त

सतगुरु को माने नही
सतगुरु मिला जु जानिये
सतगुरु मिले जु सब मिले
यह सतगुरु उपदेश है


_
_

कबीर के भजन – Sant Kabir Ke Bhajan

माटी कहे कुम्हार से
माटी कहे कुम्हार से,
तू क्या रोंदे मोहे।
एक दिन ऐसा आएगा,
मैं रोंदूगी तोहे॥


मन लाग्यो मेरो यार, फ़कीरी में
मन लाग्यो मेरो यार, फ़कीरी में
मन लाग्यो मेरो यार, फ़कीरी में
जो सुख पाऊँ नाम भजन में
सो सुख नाहिं अमीरी में


झीनी झीनी बीनी चदरिया
झीनी झीनी बीनी चदरिया
झीनी झीनी बीनी चदरिया
काहे का ताना काहे की भरनी।
कौन तार से बीनी चदरिया॥


नैया पड़ी मंझधार
नैया पड़ी मंझधार,
गुरु बिन कैसे लागे पार,
हरी बिन कैसे लागे पार।


साई की नगरिया जाना है रे बंदे
साई की नगरिया जाना है रे बंदे
जाना है रे बंदे
जग नाही अपना, बेगाना है रे बंदे
जाना है रे बंदे


_


_

कबीरदास के दोहे – Kabirdasji Ke Dohe

संत कबीर के दोहे – 1
गुरु महिमा (Guru Mahima)
भक्ति (Bhakti)
सुमिरन (Sumiran – Kabir Dohe)
मन का फेर
सतगुरु (Satguru – Kabir Dohe)
संगति – Kabirdasji ke Dohe