Jay Jay Surnayak, Jan Sukhdayak – Ram Bhajan

जय जय सुरनायक, जन सुखदायक,
प्रनतपाल भगवंता।
गो द्विज हितकारी, जय असुरारी,
सिधुंसुता प्रिय कंता॥

Sharma Bandhu

Prembhushan Maharaj

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Jay Jay Surnayak, Jan Sukhdayak – Lyrics in Hindi


जय जय सुरनायक, जन सुखदायक,
प्रनतपाल भगवंता।
गो द्विज हितकारी, जय असुरारी,
सिधुंसुता प्रिय कंता॥

॥जय जय सुरनायक॥


पालन सुर धरनी, अद्भुत करनी,
मरम न जानइ कोई।
जो सहज कृपाला, दीनदयाला,
करउ अनुग्रह सोई॥

जय जय अबिनासी, सब घट बासी
ब्यापक परमानंदा।
अबिगत गोतीतं चरित पुनीतं,
मायारहित मुकुंदा॥

॥जय जय सुरनायक॥

(नारायण नारायण नारायण।
भजमन नारायण नारायण।)


जेहि लागि बिरागी अति अनुरागी
बिगतमोह मुनिबृंदा।
निसि बासर ध्यावहिं गुन गन गावहिं,
जयति सच्चिदानंदा॥

जेहिं सृष्टि उपाई त्रिबिध बनाई,
संग सहाय न दूजा।
सो करउ अघारी चिंत हमारी,
जानिअ भगति न पूजा॥

॥जय जय सुरनायक॥

(नारायण नारायण नारायण।
भजमन नारायण नारायण नारायण॥)


जो भव भय भंजन मुनि मन रंजन,
गंजन बिपति बरूथा।
मन बच क्रम बानी छाड़ि सयानी,
सरन सकल सुर जूथा॥

सारद श्रुति सेषा रिषय असेषा,
जा कहुँ कोउ नहि जाना।
जेहि दीन पिआरे बेद पुकारे द्
रवउ सो श्रीभगवाना॥

॥जय जय सुरनायक॥

(नारायण नारायण नारायण।
भजमन नारायण नारायण नारायण॥)


भव बारिधि मंदर, सब बिधि सुंदर,
गुनमंदिर सुखपुंजा।
मुनि सिद्ध सकल, सुर परम भयातुर,
नमत नाथ पद कंजा॥

जय जय सुरनायक, जन सुखदायक,
प्रनतपाल भगवंता।
गो द्विज हितकारी, जय असुरारी,
सिधुंसुता प्रिय कंता॥

॥जय जय सुरनायक॥


नारायण नारायण नारायण….।
श्रीमन, नारायण नारायण नारायण॥
भजमन, नारायण नारायण नारायण।
लक्ष्मी नारायण नारायण नारायण॥


दोहा:
जानि सभय सुरभूमि
सुनि बचन समेत सनेह।
गगनगिरा गंभीर भइ
हरनि सोक संदेह।


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