Maa Durga Bhajans – List – Hindi

माँ दुर्गा भजन - आरती

  • जगजननी जय जय माँ, जगजननी जय जय - अर्थसहित
    जगजननी - समस्त संसारकी माता
    जय जय माँ - सदा सर्वदा आपकी जय हो
    भयहारिणी - संसारके समस्त भयको (कष्टोंको) हरनेवाली,
    भवतारिणी - संसारका उद्धार करनेवाली एवं
    भवभामिनि - संसारको सुशोभित करनेवाली सर्वसुंदरी,
    जय जय - जगत् माता! आपकी जय हो॥
  • दुर्गा सप्तशती - प्रथम अध्याय
    मेधा ऋषि का - राजा सुरथ और समाधि को - भगवती की महिमा बताते हुए - मधु और कैटभ वध का प्रसंग सुनाना।
    महाकाली जी का ध्यान मन्त्र
    ॐ नमश्चण्डिकायै - ॐ चण्डीदेवीको नमस्कार है।
  • माँ दुर्गा के 108 नाम - अर्थसहित
    अनन्ता: जिनके स्वरूप का कहीं अन्त नहीं
    अभव्या : जिससे बढ़कर भव्य कुछ नहीं
    महिषासुर-मर्दिनि: महिषासुर का वध करने वाली
    सर्वासुरविनाशा: सभी राक्षसों का नाश करने वाली
    माहेश्वरी: प्रभु शिव की शक्ति
  • जगजननी जय जय माँ
    जगजननी जय जय माँ, जगजननी जय जय।
    भयहारिणी, भवतारिणी, भवभामिनि जय जय॥
    तू ही सत्-चित्-सुखमय, शुद्ध ब्रह्मरूपा।
    सत्य सनातन, सुन्दर, पर-शिव सुर-भूपा॥
  • अम्बे तू है जगदम्बे काली
    अम्बे तू है जगदम्बे काली,
    जय दुर्गे खप्पर वाली।
    तेरे ही गुण गायें भारती,
    नहीं मांगते धन और दौलत,
    ना चाँदी, ना सोना।
    हम तो मांगे माँ तेरे मन में,
    इक छोटा सा कोना॥
  • आरती जगजननी मैं तेरी गाऊं
    आरती जगजननी मैं तेरी गाऊं।
    तुम बिन कौन सुने वरदाती।
    किस को जाकर विनय सुनाऊं॥
    आरती जगजननी मैं तेरी गाऊं
  • दुर्गा चालीसा - नमो नमो दुर्गे सुख करनी
    नमो नमो दुर्गे सुख करनी।
    नमो नमो अम्बे दुःख हरनी॥
    निरंकार है ज्योति तुम्हारी।
    तिहूँ लोक फैली उजियारी॥
  • दुर्गा आरती - जय अम्बे गौरी
    जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।
    तुमको निशिदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिव री॥
    (श्री) अम्बेजी की आरती, जो कोई नर गावै।
    कहत शिवानंद स्वामी, सुख सम्पत्ति पावै॥
    ॥मैया जय अम्बे गौरी॥
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  • दुर्गा सप्तशती - द्वितीय अध्याय
    दुर्गा सप्तशती (द्वितीय अध्याय) - अर्थ सहित देवताओं के तेज से - देवी दुर्गा का प्रादुर्भाव और - महिषासुर की सेना का वध
    महिषासुर-मर्दिनी भगवती महालक्ष्मीका का ध्यान मन्त्र

  • नवदुर्गा - माँ दुर्गा के नौ रुप
    नवरात्रि में दुर्गा पूजा के अवसर पर माँ के नौ रूपों की पूजा-उपासना की जाती है। इन नव दुर्गा को पापों के विनाशिनी कहा जाता है।
    शैलपुत्री (Shailaputri)
    व्रह्मचारणी (Brahmacharini)
    चन्द्रघन्टा (Candraghanta)
    कूष्माण्डा (Kusamanda)
    स्कन्दमाता (Skandamata)
  • सच्ची है तू सच्चा तेरा दरबार
    सच्ची है तू, सच्चा तेरा दरबार, माता रानिये
    करदे दया की एक नज़र एक बार, माता रानिये
    क्या गम है, कैसी उलझन,
    जब सर पे तेरा हाथ है
    हर दुःख में हर संकट में,
    माता तू हमारे साथ है
  • मन तेरा मंदिर आखेँ दिया बाती
    हे महाकाल महाशक्ती, हमे दे दे ऐसी भक्ती
    हे जगजननी महामाया, है तु ही धूप और छाया
    तू अमर अजर अविनाशी, तु अनमिट पू्र्णमासी
    सब करके दुर अंधेरे, हमे बक्क्षों नये सवेरे
  • चलो बुलावा आया है, माता ने बुलाया है
    चलो बुलावा आया है,
    माता ने बुलाया है।
    वैष्णो देवी के मन्दिर मे,
    लोग मुरादे पाते है।
    रोते रोते आते है,
    हँसते हँसते जाते है।
  • भोर भई दिन चढ़ गया - माँ वैष्णो देवी आरती
    भोर भई दिन चढ़ गया, मेरी अम्बे
    हो रही जय जय कार मंदिर विच
    आरती जय माँ
    हे दरबारा वाली, आरती जय माँ
  • तुने मुझे बुलाया, शेरावालिये
    तुने मुझे बुलाया, शेरावालिये
    मैं आया, मैं आया, शेरावालिये
    सारा जग है इक बंजारा
    सब की मंजिल तेरा द्वारा
    ऊँचे परबत, लंबा रास्ता
    पर मैं रह ना पाया, शेरा वालिये

  • दुर्गा सप्तशती - तृतीय अध्याय
    दुर्गा सप्तशती (तृतीय अध्याय) - अर्थ सहित
    सेनापतियोंसहित महिषासुर का वध
    उनके मस्तकपर चन्द्रमाके साथ ही रत्नमय मुकुट बँधा है तथा वे कमलके आसन पर विराजमान हैं। ऐसी देवीको मैं भक्तिपूर्वक प्रणाम करता हूँ।
  • अब मेरी भी सुनो हे मात भवानी
    अब मेरी भी सुनो, हे मात भवानी
    मै तेरा ही बालक हूँ, जगत महारानी
    सिंह सवारी करने वाली, तेरी शान निराली है
    तू है शारदा, तू ही लक्ष्मी, तू ही तो महाकाली है
  • ऐसा प्यार बहा दे मैया
    ऐसा प्यार बहा दे मैया,
    चरणों से लग जाऊं मैं।
    सब अंधकार मिटा दे मैया,
    दरस तेरा कर पाऊं मैं॥
  • नवदुर्गा - माँ दुर्गा का पहला स्वरूप - माँ शैलपुत्री
    देवी शैलपुत्री नव दुर्गाओं में प्रथम दुर्गा हैं।
    शैलपुत्री दुर्गा का महत्त्व और शक्तियाँ अनन्त हैं।
    नवरात्र पूजन में प्रथम दिवस इन्हीं की पूजा और उपासना की जाती है।
  • आज तेरा जगराता माता, आज तेरा जगराता
    आज तेरा जगराता माता, आज तेरा जगराता
    जगमग करती पावन ज्योति, हर कोई शीश झुकाता
    जिनके सर पे हाथ तुम्हारा
    तूफानों में पाए किनारा
    वो ना बहके वो ना भटके
    तू दे जिनको आप सहारा
  • माँ शैलपुत्री स्तुति
    जय माँ शैलपुत्री प्रथम,
    दक्ष की हो संतान।
    नवरात्री के पहले दिन,
    करे आपका ध्यान॥
  • बोलो माँ के जयकारे, मिट जाये संकट सारे
    तुम बोलो रे जयकारे, पहुचेंगे माँ के द्वारे
    पहुचेंगे माँ के द्वारे, माँ बैठी राह निहारे
    माँ बैठी राह निहारे, बैठी है खोल भंडारे
    जो बोलेगा जयकारे, माँ उसके भाग सँवारे
  • बिगड़ी मेरी बना दे, ऐ शेरोंवाली मैया
    बिगड़ी मेरी बना दे, ऐ शेरोंवाली मैया
    ऐ शेरोंवाली मैया, देवास वाली मैया
    ऐ मेहरों वाली मैया, ऐ खंडवा वाली मैया
    अपना मुझे बना ले, ऐ शेरोंवाली मैया

  • दुर्गा सप्तशती - चौथा अध्याय
    श्री दुर्गा सप्तशती (चौथा अध्याय) - अर्थ सहित
    इन्द्रादि देवताओं द्वारा देवीकी स्तुति
    चण्डिके! पूर्व, पश्चिम और दक्षिण दिशामें आप हमारी रक्षा करें तथा
    ईश्वरि! अपने त्रिशूलको घुमाकर आप उत्तर दिशामें भी हमारी रक्षा करें।
  • कभी फुर्सत हो तो जगदम्बे
    कभी फुर्सत हो तो जगदम्बे,
    निर्धन के घर भी आ जाना
    इस श्रद्धा की रख लो लाज हे माँ,
    इस अर्जी को ना ठुकरा जाना
  • प्यारा सजा है तेरा द्वार, भवानी
    प्यारा सजा है तेरा द्वार, भवानी
    तेरे भक्तों की लगी है कतार, भवानी
    पल में भरती झोली खाली
    तेरे खुले दया के भण्डार, भवानी
  • शेर पे सवार होके आजा शेरावालिये
    शेर पे सवार होके आजा शेरा वालिये
    सोये हुए भाग्य जगा जा शेरावालिये
    शेरा वालिये, माँ ज्योता वालिये
    ज्योत माँ जगा के तेरी आस ये लगाई है
    जिन का ना कोई उनकी, तुही माँ सहाई है
    रौशनी अंधेरो में दिखा जा शेरावालिये
  • नवदुर्गा - माँ दुर्गा का दूसरा स्वरूप - माँ ब्रह्मचारिणी
    माँ दुर्गा दूसरा स्वरूप ब्रह्मचारिणी का है।
    नवरात्र पर्व के दूसरे दिन माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा-अर्चना की जाती है।
    ब्रह्मचारिणी अर्थात तप की चारिणी, तप का आचरण करने वाली।
    देवी की उपासना से मनुष्य में तप, त्याग, सदाचार व संयम की वृद्धि होती है।
  • आ माँ आ, तुझे दिल ने पुकारा
    तूने ही पाला है मुझको, तू ही मुझे संभाले
    तूने ही मेरे जीवन मे, पल पल किये उजाले
    चरणों मे तेरे मैंने, तन मन वारा माँ
    आ माँ आ, तुझे दिल ने पुकारा
  • ब्रह्मचारिणी स्तुति - जय माँ ब्रह्मचारिणी
    जय माँ ब्रह्मचारिणी,
    ब्रह्मा को दिया ग्यान।
    नवरात्री के दुसरे दिन
    सारे करते ध्यान॥

  • दुर्गा सप्तशती - चौथा अध्याय
    श्री दुर्गा सप्तशती (चौथा अध्याय) - अर्थ सहित
    इन्द्रादि देवताओं द्वारा देवीकी स्तुति
    चण्डिके! पूर्व, पश्चिम और दक्षिण दिशामें आप हमारी रक्षा करें तथा
    ईश्वरि! अपने त्रिशूलको घुमाकर आप उत्तर दिशामें भी हमारी रक्षा करें।
  • दुर्गा सप्तशती - पाँचवाँ अध्याय
    पाँचवाँ अध्याय (श्री दुर्गा सप्तशती) - अर्थ सहित
    देवताओंद्वारा देवीकी स्तुति,
    या देवी सर्वभूतेषु बुद्धिरूपेण संस्थिता।
    नमस्तस्यै, नमस्तस्यै, नमस्तस्यै नमो नमः
  • कभी फुर्सत हो तो जगदम्बे
    कभी फुर्सत हो तो जगदम्बे,
    निर्धन के घर भी आ जाना
    इस श्रद्धा की रख लो लाज हे माँ,
    इस अर्जी को ना ठुकरा जाना
  • प्यारा सजा है तेरा द्वार, भवानी
    प्यारा सजा है तेरा द्वार, भवानी
    तेरे भक्तों की लगी है कतार, भवानी
    पल में भरती झोली खाली
    तेरे खुले दया के भण्डार, भवानी
  • नवदुर्गा - माँ दुर्गा का तीसरा रूप - माँ चन्द्रघण्टा
    माँ दुर्गाजी का तीसरा स्वरुप - माँ चन्द्रघण्टा
    नवरात्रि का तीसरा दिन माँ चन्द्रघण्टा की उपासना का दिन होता है।
    माँ चंद्रघंटा का स्वरूप परम शान्तिदायक और कल्याणकारी है।
    इनकी कृपासे साधक के समस्त पाप और बाधाएँ नष्ट हो जाती हैं।
  • शेर पे सवार होके आजा शेरावालिये
    शेर पे सवार होके आजा शेरा वालिये
    सोये हुए भाग्य जगा जा शेरावालिये
    शेरा वालिये, माँ ज्योता वालिये
    ज्योत माँ जगा के तेरी आस ये लगाई है
    जिन का ना कोई उनकी, तुही माँ सहाई है
    रौशनी अंधेरो में दिखा जा शेरावालिये
  • नवदुर्गा - माँ दुर्गा का दूसरा स्वरूप - माँ ब्रह्मचारिणी
    माँ दुर्गा दूसरा स्वरूप ब्रह्मचारिणी का है।
    नवरात्र पर्व के दूसरे दिन माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा-अर्चना की जाती है।
    ब्रह्मचारिणी अर्थात तप की चारिणी, तप का आचरण करने वाली।
    देवी की उपासना से मनुष्य में तप, त्याग, सदाचार व संयम की वृद्धि होती है।
  • आ माँ आ, तुझे दिल ने पुकारा
    तूने ही पाला है मुझको, तू ही मुझे संभाले
    तूने ही मेरे जीवन मे, पल पल किये उजाले
    चरणों मे तेरे मैंने, तन मन वारा माँ
    आ माँ आ, तुझे दिल ने पुकारा
  • ब्रह्मचारिणी स्तुति - जय माँ ब्रह्मचारिणी
    जय माँ ब्रह्मचारिणी,
    ब्रह्मा को दिया ग्यान।
    नवरात्री के दुसरे दिन
    सारे करते ध्यान॥

  • दुर्गा सप्तशती - छठा अध्याय
    छठा अध्याय (श्री दुर्गा सप्तशती) - अर्थ सहित
    धूम्रलोचन-वध
    देवीने धूम्रलोचन असुरको मार डाला तथा उसके सिंहने सारी सेनाका सफाया कर डाला
  • नवदुर्गा - माँ दुर्गा का चौथा रूप - माँ कूष्माण्डा
    माँ दुर्गाजीके चौथे स्वरूपका नाम कूष्माण्डा है।
    माँ कूष्माण्डा सृष्टिकी आदि-स्वरूपा और आदि शक्ति हैं।
    नवरात्र-पूजनके चौथे दिन कूष्माण्डा देवीके स्वरूपकी ही उपासना की जाती है।
    देवी की उपासनासे भक्तोंके समस्त रोग-शोक नष्ट हो जाते हैं।
  • कैसी यह देर लगाई है दुर्गे
    कैसी यह देर लगाई है दुर्गे
    हे मात मेरी, हे मात मेरी।
    शरण पड़े हैं हम तुम्हारी
    करो यह नैया पार हमारी।
  • चरणों में रखना, मैया जी मुझे चरणों में रखना
    बन के सवाली ये जग सारा
    पाता है तुझसे नजराने
    मै क्या बोलू मुझ से ज्यादा
    मेरे मन की माँ तू जाने
  • पार करो मेरा बेडा भवानी
    पार करो मेरा बेडा भवानी, पार करो मेरा बेडा
    छाया घोर अँधेरा भवानी, पार करो मेरा बेडा
    जग जननी तेरी ज्योत जगाई,
    एक दीदार की आस लगाई
    हृदय करो बसेरा भवानी,
    हृदय करो बसेरा
  • तुम बसी हो कण कण अन्दर माँ
    तुम बसी हो कण कण अन्दर माँ
    हम ढूंढते रह गये मंदिर में
    तेरी माया को न जान सके
    तुझको न कभी पहचान सके
    हम मोह की निद्रा सोये रहे
    माँ इधर उधर ही खोये रहे
  • मैं बालक, तू माता शेरावालिये
    मैं बालक, तू माता शेरावालिये
    है अटूट यह नाता, शेरावालिये
    तेरी ममता मिली है मुझको
    तेरा प्यार मिला है
    तुने बुद्धि, तुने साहस, तुने ज्ञान दिया

  • दुर्गा सप्तशती - सातवा अध्याय
    सातवा अध्याय (श्री दुर्गा सप्तशती) - अर्थ सहित
    चण्ड और मुण्डका वध
    देवि! तुम चंड और मुंड को लेकर मेरे पास आयी हो,
    इसलिए संसार में चांमुडा के नाम से तुम्हारी ख्याति होगी।
  • नवदुर्गा - माँ दुर्गा का पाचवां रूप - माँ स्कंदमाता
    दुर्गाजीके पाँचवें स्वरूपको स्कंदमाताके नामसे जाना जाता।
    नवरात्री का पाँचवाँ दिन स्कंदमाता की उपासना का दिन होता है।
    भगवती दुर्गा जी का ममता स्वरूप हैं माँ स्कंदमाता।
    माँ अपने भक्त की समस्त इच्छाओं की पूर्ति करती हैं।
  • जागो हे जगदम्बे, जागो हे ज्वाला
    जागो हे जगदम्बे, जागो हे ज्वाला
    जागो हे दुर्गे माँ, जागो प्रितपाला।
    जागो दिलों के अन्धकार को मिटा दो
    भटके हुए को माँ रौशनी दिखा दो।
  • तेरे दरबार में मैया ख़ुशी मिलती है
    तेरे दरबार में मैया ख़ुशी मिलती है।
    जिंदगी मिलती है,
    रोतो को हंसी मिलती है।
    रोता हुआ आये जो, हंसता हुआ जाता है
    मन की मुरादों को, वो पाता हुआ जाता है
  • माँ मुरादे पूरी करदे हलवा बाटूंगी
    माँ मुरादे पूरी करदे हलवा बाटूंगी
    ज्योत जगा के, सर को झुका के
    मैं मनाऊंगी, दर पे आउंगी,
    संतो महंतो को बुला के
    घर में कराऊं जगराता
    सुनती है सब की फ़रियादे,
    मेरी भी सुन लेगी माता
  • बेटा जो बुलाए, माँ को आना चाहिए
    मैया जी के चरणों मे ठिकाना चाहिए
    बेटा जो बुलाए, माँ को आना चाहिए
    बिगड़े काम संवारे, भव से वो सब को तारे
    श्रद्धा और प्रेम से ध्याना चाहिए
    बेटा जो बुलाए, माँ को आना चाहिए

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  • दुर्गा सप्तशती - आठवां अध्याय
    आठवां अध्याय (श्री दुर्गा सप्तशती) - अर्थ सहित
    रक्तबीज-वध
    मैं भवानीका ध्यान करता हूँ। उनके शरीरका रंग लाल है, नेत्रोंमें करुणा लहरा रही है
    तथा हाथोंमें पाश, अंकुश, बाण और धनुष शोभा पाते हैं ।
  • नवदुर्गा - माँ दुर्गा का छठवां रूप - कात्यायनी देवी
    माँ दुर्गा का छठवां स्वरूप - माँ कात्यायनी
    नवरात्रि का छठा दिन माँ कात्यायनी की उपासना का दिन होता है।
    इनके पूजन से अद्भुत शक्ति का संचार होता है।
    दुश्मनों का संहार करने में देवी सक्षम बनाती हैं।
  • तेरे नाम की लगी है लगन माता
    तेरे नाम की लगी है लगन माता
    हमे कब होंगे तेरे दर्शन माता
    बिगड़े भाग्य हमारे,
    तुम बिन कौन सवारे
    तेरे ही सहारे जीवन माता
  • माता रानी का ध्यान धरिये
    माता रानी का ध्यान धरिये
    काम जब भी कोई करिए
    कोई मुश्किल हो पल में टलेगी,
    हर जगह पे सफलता मिलेगी
  • खुशहाल करती, माला माल करती
    खुशहाल करती, माला माल करती
    शेरावाली, अपने भक्तो को निहाल करती
    अम्बे रानी वरदानी देती, खोल के भंडारे
    झोली ले गया भराके, आया चल के जो द्वारे
    माँ के नाम वाला अमृत, जो पिलो एक बार
    होगा बाल ना बांका, चाहे बैरी हो संसार
  • शक्ति दे माँ, शक्ति दे माँ
    तेरे द्वारे जो भी आया,
    उसने जो माँगा वो पाया
    मैं भी तेरा सवाली,
    शक्तिशाली शेरों वाली, माँ जगदम्बे

  • दुर्गा सप्तशती - नवा अध्याय
    नवा अध्याय (श्री दुर्गा सप्तशती) - अर्थ सहित
    निशुंभ का वध
    मैं अर्धनारीश्वरके श्रीविग्रहकी निरन्तर शरण लेता हूँ।
    वह अपनी भुजाओंमें सुन्दर अक्षमाला, पाश,. और वरद-मुद्रा धारण करता है
  • नवदुर्गा - माँ दुर्गा का सातवां रूप - माँ कालरात्रि
    माँ दुर्गा का सातवां स्वरूप - माँ कालरात्रि
    दुर्गापूजा के सातवें दिन माँ कालरात्रि की उपासना का विधान है।
    माँ कालरात्रि दुष्टों का विनाश करने वाली हैं।
    कालरात्रि देवीकी कृपा से साधक सर्वथा भय-मुक्त हो जाता है।
  • तेरे भाग्य के चमकेंगे तारे
    तेरे भाग्य के चमकेंगे तारे,
    भरोसा रख माता रानी पे।
    क्यूँ डरता है देख के अँधेरा,
    आ जायेगा रे ख़ुशी का सवेरा
    भरोसा रख माता रानी पे।
  • माता वैष्णो के आए नवरात्रे
    मालिने बनादे एक सेहरा नी,
    माता वैष्णो के आए नवरात्रे।
    फूल श्रद्धा के होएंगे जब अर्पण,
    शुद्ध होएगा रे मनवा का दर्पण।
  • हेल्लो हाय छोड़िए, जय माता दी बोलिए
    हेल्लो हाय छोड़िए,
    जय माता दी बोलिए।
    एक बार जो सच्चे मन से
    माँ का नाम ध्यायेगा।
    भोली भाली मैया से वो
    मन चाहा फल पायेगा॥
  • आये तेरे भवन, देदे अपनी शरण
    आये तेरे भवन, देदे अपनी शरण।
    रहे तुझ में मगन, थाम कर यह चरण।
    चरणों में बहती है गंगा की धारा
    आरती का दीप लगे हर एक सितारा।
  • करती हूँ तुम्हारा व्रत मैं - बेडा पार करो माँ
    करती हूँ तुम्हारा व्रत मैं,
    बेडा पार करो माँ,
    कल्याण मेरा हो सकता है,
    माँ आप जो चाहें
    हे माँ संतोषी, माँ संतोषी

  • दुर्गा सप्तशती - दसवाँ अध्याय
    दसवाँ अध्याय (श्री दुर्गा सप्तशती) - अर्थ सह

    निशुंभ का वध
    मैं मस्तकपर अर्धचन्द्र धारण करनेवाली शिवशक्तिस्वरूपा भगवतीका हृदयमें चिन्तन करता हूँ।
    सूर्य, चन्द्रमा और अग्रि-ये ही तीन उनके नेत्र हैं
  • दिल वाली पालकी
    दिल वाली पालकी विच
    तेनू माँ बिठाणा ऐ।
    दिल वाला हाल असाँ,
    तेनू ही सुनाना ऐ।
  • माँ की हर बात निराली है
    वक़्त की चाल बदले,
    दुःख के जंजाल बदले
    इसके चरणों में झुककर,
    बड़े कंगाल बदले
  • आज अष्टमी की पूजा करवाउंगी
    आज अष्टमी की पूजा करवाउंगी
    ज्योत मैया जी की पावन जलाऊंगी
    अष्टमी का दिन तो होता है, मुरादे पाने का
    खोल के रखती द्वारा मैया,
    ममता भरे खजाने का
  • जय अम्बे जगदम्बे माता जय अम्बे
    सबकी विपदा हरने वाली,
    सब पर किरपा करने वाली
    सबकी झोली भरने वाली,
    मुझको भी रस्ता दिखा, मेरी माँ.
  • तेरे मंदिरों मे अमृत बरसे माँ
    तेरे मंदिरों में अमृत बरसे माँ,
    तेरे भक्तों के मन की प्यास बुझी,
    अब रूह किसी की ना तरसे माँ
    मिट जाता अन्धकार दिलों का,
    आखे है खुल जातीं

  • दे माँ, निज चरणों का प्यार (Prayer)
    तुझ को जानूँ, तुझ को मानूँ,
    तुझ पर ही निज जीवन वारूँ।
    ध्यान रहे तेरा ही निस-दिन,
    दे भक्ति का उपहार॥
  • दुर्गा सप्तशती - ग्यारहवां अध्याय
    ग्यारहवां अध्याय (श्री दुर्गा सप्तशती) - अर्थ सहित
    देवताओंद्वारा देवीकी स्तुति तथा देवीद्वारा देवताओंको वरदान
    (जगदंबा द्वारा देवताऒं को रक्षा का वरदान) मैं भुवनेश्वरी देवीका ध्यान करता हूँ।
    उनके श्रीअंगोकी आभा प्रभातकालके सूर्यके समान है और मस्तकपर चन्द्रमाका मुकुट है
  • मैया मै निहाल हो गया
    सब करदी मुरादे पूरी
    मैया मै निहाल हो गया।
    मैया दयावान तूने दिया दोनों हाथो से
    इतना की झोली ना समाया है।
  • आओ मेरी शेरावाली माँ
    आओ मेरी शेरावाली माँ
    आओ मेरी ज्योतावाली माँ
    मेरे सोये भाग जगा दो
    ओ मैया मेरी जगदम्बे
  • चारो धाम का फल पायेगा
    चारो धाम का फल पायेगा
    तू जिस के दीदार से
    ऐसा तीर्थ मिलेगा केवल
    मैया के दरबार पे
    झोली फैला के जाएगा,
    भर भर के मुरादे लाएगा
  • तेरे शरण आए, देखो हे अम्बे माता
    तेरे शरण आए, देखो हे अम्बे माता,
    चारो दिशा से, भक्ति आशा से,
    भक्तो की भीड़ आयी, हो माता
    भक्तो की पीड़ा, हरनेवाली माँ,
    कोटि कोटि है प्रणाम, हो माता

  • दुर्गा सप्तशती - बारहवां अध्याय
    बारहवां अध्याय (श्री दुर्गा सप्तशती) - अर्थ सहित
    देवी-चरित्रों के पाठ का माहात्म्य
    मैं तीन नेत्रोंवाली दुर्गादेवीका ध्यान करता हूँ,
    उनके श्रीअंगोकी प्रभा बिजलीके समान है।
    उनका स्वरूप अग्रिमय है तथा वे माथेपर चन्द्रमाका मुकुट धारण करती हैं।

  • दुर्गा सप्तशती - तेरहवां अध्याय
    तेरहवां अध्याय (श्री दुर्गा सप्तशती) - अर्थ सहित
    सुरथ और वैश्य को देवी का वरदान
    जो उदयकालके सूर्यमण्डलकी-सी कान्ति धारण करनेवाली हैं,
    उन शिवादेवीका मैं ध्यान करता हूँ।

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