Maa Saraswati Aarti – Hindi

जय सरस्वती माता,
जय जय सरस्वती माता।
सद्दग़ुण वैभव शालिनि,
त्रिभुवन विख्याता॥
जय जय सरस्वती माता

Alka Yagnik

Anuradha Paudwal

_

Jai Saraswati Mata – Maa Saraswati Aarti – Lyrics


जय सरस्वती माता,
जय जय सरस्वती माता।
सद्दग़ुण वैभव शालिनि,
त्रिभुवन विख्याता॥
जय जय सरस्वती माता


चंद्रवदनि पद्मासिनि,
द्युति (छवि) मंगलकारी।
मैया द्युति मंगलकारी।

सोहे शुभ हंस सवारी,
अतुल तेजधारी॥
जय जय सरस्वती माता


बाएं कर में वीणा,
दाएं कर माला।
मैया दाएं कर माला।

शीश मुकुट मणि सोहे,
गल मोतियन माला॥
जय जय सरस्वती माता


देवि शरण जो आए,
उनका उद्धार किया।
मैया उनका उद्धार किया।

पैठि मंथरा दासी,
रावण संहार किया॥
जय जय सरस्वती माता


विद्या ज्ञान प्रदायिनि,
ज्ञान प्रकाश भरो।
मैया ज्ञान प्रकाश भरो।

मोह, अज्ञान और तिमिर का,
जग से नाश करो॥
जय जय सरस्वती माता


धूप दीप फल मेवा,
मां स्वीकार करो।
मां स्वीकार करो।

ज्ञानचक्षु दे माता,
जग निस्तार करो॥
जय जय सरस्वती माता


मां सरस्वती की आरती,
जो कोई जन गावे।
मैया जो कोई जन गावे।

हितकारी सुखकारी,
ज्ञान भक्ति पावे॥
जय जय सरस्वती माता


जय सरस्वती माता,
जय जय सरस्वती माता।

सद्दग़ुण वैभव शालिनि,
त्रिभुवन विख्याता॥
जय जय सरस्वती माता


For more bhajans from category, Click -

-
-

_

Mata ke Bhajan

_

Bhajan List

Durga Bhajans – Hindi
Devi Aarti – Hindi
Bhajan, Aarti, Chalisa, Dohe – List

_
_

Durga Bhajan Lyrics

_
_

Bhajans and Aarti

_
_

Bhakti Song Lyrics

  • हरी नाम का प्याला
    हरी नाम का प्याला प्याला
    हरे कृष्ण की हाला।
    ऐसी हाला पी पीकर के
    चला चले मतवाला॥
  • ऐ श्याम तेरी मुरली
    ऐ श्याम तेरी मुरली, पागल कर जाती है
    मुस्कान तेरी मीठी, घायल कर जाती है
    ये सोने की होती, ना जाने क्या होता
    ये बांस की हो कर के, इतना इतराती है
  • श्री गजानन महाराज (शेगांव) आरती
    जय जय सतचित स्वरूपा स्वामी गणराया।
    अवतरलासी भूवर जड मुढ ताराया॥
    निर्गुण ब्रह्म सनातन अव्यय अविनाशी।
    स्थिरचर व्यापून उरलें जे या जगताशी॥
  • तेरे पूजन को भगवान
    तेरे पूजन को भगवान,
    बना मन मंदिर आलीशान।
    किस ने जानी तेरी माया,
    किस ने भेद तिहारा पाया।
    ऋषि मुनि हारे कर कर ध्यान,
    बना मन मंदिर आलीशान॥
  • मेरे दाता के दरबार में
    मेरे दाता के दरबार में, सब लोगो का खाता।
    जो कोई जैसी करनी करता, वैसा ही फल पाता॥
    क्या साधू क्या संत गृहस्थी, क्या राजा क्या रानी।
    प्रभू की पुस्तक में लिक्खी है, सबकी कर्म कहानी।
    अन्तर्यामी अन्दर बैठा, सबका हिसाब लगाता॥
_