Om Jai Jagdish Hare Aarti

Krishna Mantra Jaap (श्री कृष्ण मंत्र जाप)

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय हरे राम – हरे कृष्ण श्री कृष्ण शरणम ममः
हरे कृष्ण हरे कृष्ण – कृष्ण कृष्ण हरे हरे – हरे राम हरे राम – राम राम हरे हरे
Krishna Bhajan
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Om Jai Jagdish Aarti in Hindi

ओम जय जगदीश हरे


ओम जय जगदीश हरे,
स्वामी जय जगदीश हरे।

ओम जय जगदीश हरे,
स्वामी जय जगदीश हरे।
भक्त जनों के संकट,
क्षण में दूर करे॥
॥ओम जय जगदीश हरे॥

ओम जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे

जो ध्यावे फल पावे,
दुख बिनसे मन का।
स्वामी दुख बिनसे मन का

सुख सम्पति घर आवे,
कष्ट मिटे तन का॥
॥ओम जय जगदीश हरे॥


मात पिता तुम मेरे,
शरण गहूं मैं किसकी।
स्वामी शरण गहूं किसकी

तुम बिन और न दूजा,
आस करूं मैं किसकी॥
॥ओम जय जगदीश हरे॥

श्री कृष्ण – द्वापरयुग में भगवान विष्णु के अवतार

तुम पूरण परमात्मा,
तुम अंतरयामी।
स्वामी तुम अंतरयामी

पारब्रह्म परमेश्वर,
तुम सब के स्वामी॥
॥ओम जय जगदीश हरे॥


तुम करुणा के सागर,
तुम पालनकर्ता,
स्वामी तुम पालनकर्ता।

मैं मूरख खल कामी,
कृपा करो भर्ता॥
॥ओम जय जगदीश हरे॥

Shree Ram
श्री राम – त्रेतायुग में भगवान विष्णु के अवतार

तुम हो एक अगोचर,
सबके प्राणपति।
स्वामी सबके प्राणपति

किस विधि मिलूं दयामय,
तुमको मैं कुमति॥
॥ओम जय जगदीश हरे॥


दीनबंधु दुखहर्ता,
तुम रक्षक मेरे।
स्वामी तुम रक्षक मेरे

अपने हाथ बढाओ,
द्वार पडा तेरे॥
॥ओम जय जगदीश हरे॥

दीनबंधु दुखहर्ता, तुम रक्षक मेरे

विषय विकार मिटाओ,
पाप हरो देवा।
स्वमी पाप हरो देवा

श्रद्धा भक्ति बढ़ाओ,
संतन की सेवा॥
॥ओम जय जगदीश हरे॥


तन मन धन सब कुछ है तेरा,
(तन मन धन जो कुछ है,
सब ही है तेरा।)
स्वामी सब कुछ है तेरा

तेरा तुझको अर्पण,
क्या लागे मेरा॥
॥ओम जय जगदीश हरे॥

Shree Vishnu – Jagdish

ओम जय जगदीश हरे,
स्वामी जय जगदीश हरे।

भक्त जनों के संकट,
दास जनों के संकट,
क्षण में दूर करे॥
॥ओम जय जगदीश हरे॥

Om Jai Jagdish Hare
Om Jai Jagdish Hare

ओम जय जगदीश हरे,
स्वामी जय जगदीश हरे।
भक्त जनों के संकट,
दास जनों के संकट,
क्षण में दूर करे॥

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श्री हरी की भक्ति

मुक्ति के आदि कारण श्री हरि को अपने ह्रदय में स्थापित करके, जो प्रतिदिन भक्ति पूर्वक उनका चिंतन करता है, वह मोक्ष का भागी होता है। जो ईश्वर का भक्ति पूर्वक पूजन करते हैं, उन्हें दुखमयी यातना नहीं भोगनी पड़ती।

जो भगवान श्रीहरि की आराधना में संलग्न हो, नियमित रूप से उनका ध्यान करता है, वह मनुष्य संसार बन्धनमें नहीं पड़ता।


ओम जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे।
भक्त जनों के संकट, दास जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥ ओम जय जगदीश हरे॥


जो सब समय में भगवान श्री हरि के चरणों में अपने कर्मों को अर्पण करता है, वह संपूर्ण कामनाओं को पा लेता है। ईश्वर भक्ति और ध्यान से मनुष्य सब पापों से शुद्ध चित्त होकर उत्तम गति को प्राप्त होता है और श्रीहरि में तन्मयताको प्राप्त होता है।


एक ही परमात्मा है, कोई उसका दुसरा नहीं। एक ही को लोग बहुत से नामोंसे वर्णन करते है। है एक ही, किन्तु उसको बहुत प्रकारसे कल्पना करते है। इसलिए मनुष्य मात्रको उचित है की, नित्य सुबह-शाम उस सर्वव्यापी परमात्मा का, उस हरी का, ध्यान करें और उसकी स्तुति करें।

मनुष्य प्रतिदिन उठकर सारे जगतके स्वामी, देवताओंके देवता, अनंत पुरुषोत्तमकी सहस्र नामोंसे स्तुति करें। सारे लोकके महेश्वर, लोकके अध्यक्ष (अर्थात शासन करनेवाले) सर्व लोकमे व्यापक भगवान विष्णु की, जो ना कभी जन्मे है, न जिनका कभी मरण होगा, नित्य स्तुति करता हुआ मनुष्य सब दुःखोंसे मुक्त हो जाता है। जो सबसे बड़ा तेज है, सबसे बड़ा तप है, सबसे बड़ा ब्रह्म हैं और सब प्राणियोंके सबसे बड़े शरण है, वे भगवान् श्री जगदीश्वर ही है। वे श्री हरी ही है, जो पवित्रोंमें सबसे पवित्र, सब मंगल बातोंके मंगल, देवताओंके देवता और सब प्राणिमात्रके अविनाशी पिता है।

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श्री हरिके चरणों में श्रद्धा सुमन

ओम जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे

ओम जय जगदीश हरे,
स्वामी जय जगदीश हरे।

छु लेने दो प्रभु चरणों को,
तेरे दर के पुजारी नाथ हैं ये।
कर लेने दो दर्शन आँखों को,
अब दरस की प्यासी नाथ है ये॥

है धन्य जुगल पद आज भये,
जो चलकर तेरे दर आये।
प्रभु चरनन में जो ये शीश झुका,
धन्य भया अब माथ हैं ये॥

आज कृतारथ वाणी है,
भगवान का जो गुणगान किया।
है नाथ तेरा पूजन करके,
सफल भये अब हाथ हैं ये॥

कर्ण हमारे धन्य भये,
प्रभु नाम सुने जो आ करके।
चरण कमल जो मन में धरे,
है धन्य भया हदय नाथ है ये॥

चाह नहीं कुछ और हमें,
मन मंदिर में तुम आन बसों।
कण कण में प्रभु दरस मिले,
भक्त की अब बस विनती है ये॥

ओम जय जगदीश हरे,
स्वामी जय जगदीश हरे।
भक्त जनों के संकट,
क्षण में दूर करे॥
॥ओम जय जगदीश हरे॥


देखा करूं सुन्दर तुम्हारी
मूर्ति ही मनमोहिनी।
सुनता रहूं सरस कथा
बस आपकी ही सोहनी॥

इससे अधिक सुख है नहीं,
यदि हो ना लूंगा मैं कभी।
भगवद चरणों में ही मुझे
आनंद मिलता है सभी॥

हे प्रभु, सेवक की प्रार्थना
यह पूर्ण कृपया कीजिये।
शरण में मै आपके हूं,
भवसागर से तार दीजिये॥


ओम जय जगदीश हरे,
स्वामी जय जगदीश हरे।
भक्त जनों के संकट,
क्षण में दूर करे॥
॥ओम जय जगदीश हरे॥

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Om Jai Jagdish Hare

Anuradha Paudwal

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Om Jai Jagdish Hare Aarti – Vishnu Aarti


Om Jai Jagdish Hare,
Swami Jai Jagadish Hare

Bhakt jano ke sankat
daas jano ke sankat
Kshan mein door kare
Om Jai Jagadish Hare

Jo dhyaave phal paave,
dukh bin se man ka
Swami dukh bin se man ka

Sukh sampati ghar aave,
kasht mite tan kaa
Om Jai Jagadish Hare

Maat pita tum mere,
sharan gahoon (main) kiski
Swami sharan gahoon kiski

Tum bin aur na dooja,
aas karu main kiski
Om Jai Jagadish Hare

Tum puran parmatma,
tum antaryami
Swami tum antaryami

Paar brahma parameshwar,
tum sabke swami
Om Jai Jagadish Hare

Tum karuna ke saagar,
tum paalan karta
Swami tum paalan karta

Main moorakh khal-khami,
kripa karo bharta
Om Jai Jagadish Hare

Tum ho ek agochar,
sab ke praan pati
Swami sab ke praan pati

Kis vidhi miloon dayamaya,
tum ko main kumati
Om Jai Jagadish Hare

Deen-bandhu dukh-harta,
tum rakhshak mere
Swami tum rakhshak mere

Apne haath badhao,
dwaar padaa tere
Om Jai Jagadish Hare

Vishay vikaar mitaao,
paap haro deva
Swami paap haro deva

Shradha bhakti badhao,
santan ki seva
Om Jai Jagadish Hare

Tan man dhan sab kuch hai tera
(Tan man dhan jo kucha hai,
sab hee hai tera,)
Swami sab kuch hai tera

Tera tujhko arpan,
kya lage mera
Om Jai Jagadish Hare

Om jai Jagadish hare
Swami jai Jagadish hare

bhakt jano ke sankat
Daas jano ke sankat
kshan men door kare
Om Jai Jagadish Hare

Om Jai Jagdish Hare
Om Jai Jagdish Hare

Om jai Jagadish hare
Swami jai Jagadish hare
Bhakt jano ke sankat
Daas jano ke sankat
kshan men door kare

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Krishna Bhajans

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Shraddha Suman

Om Jai Jagdish Hare,
Swami Jai Jagadish Hare

Chhoo lene do prabhu charano ko,
tere dar ke pujaari naath hain ye.
Kar lene do darshan aankhon ko,
ab daras ki pyaasi naath hai ye.

Hai dhanya jugal pad aaj bhaye,
jo chalakar tere dar aaye.
Prabhu charanan mein jo ye shish jhuka,
dhanya bhaya ab maath hain ye.

Aaj kritaarath vaani hai,
bhagavaan ka jo gunagaan kiya.
Hai naath tera poojan karake,
saphal bhaye ab haath hain ye.

Karn hamaare dhanya bhaye,
prabhu naam sune jo aa kar ke.
Charan kamal jo man mein dhare,
hai dhany bhaya haday naath hai ye.

Chaah nahin kuchh aur hamein,
man mandir mein tum aan bason.
Kan kan mein prabhu daras mile,
bhakt ki ab bas vinati hai ye.

Om Jai Jagdish Hare,
Swami Jai Jagadish Hare
Bhakt jano ke sankat
daas jano ke sankat
Kshan mein door kare
Om Jai Jagadish Hare


Man mein chaah yahi hai,
seva karoon nit aapaki.
Sachchi lagan ho he prabho,
tav naam ke shubh jaap ki.

Dekha karoon sundar tumhaari
moorti hi manamohini.
Sunata rahoon saras katha
bas aapaki hi sohani.

Isase adhik sukh hai nahin,
yadi ho na loonga main kabhi.
Bhagavad charanon mein hi
mujhe aanand milata hai sabhi.

He prabhu, sevak ki praarthana
yah poorn kripaya kijiye.
Sharan mein mai aapake hoon,
bhavsagar se taar dijiye


Om Jai Jagdish Hare,
Swami Jai Jagadish Hare
Bhakt jano ke sankat
daas jano ke sankat
Kshan mein door kare
Om Jai Jagadish Hare

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